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OPEC+ की बैठक: कच्चे तेल की कीमतों पर चर्चा

OPEC+ देशों के मंत्रियों की आज एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है, जिसमें कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि उत्पादन कोटा बढ़ाने का निर्णय शायद ही कीमतों पर कोई प्रभाव डालेगा। जानें इस संकट का क्या असर होगा और यूएई के ओPEC छोड़ने से संगठन की ताकत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक

नई दिल्ली: OPEC+ देशों के मंत्रियों की आज एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक हो रही है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करना है। ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।


उत्पादन कोटा बढ़ाने पर विचार

इस संकट का समाधान निकालने के लिए संगठन उत्पादन कोटा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान भूराजनीतिक स्थिति को देखते हुए ओPEC+ के इस कदम का कीमतों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।


होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना

फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है, जो वैश्विक तेल की कीमतों को लगभग दोगुना कर चुका है। इस स्थिति ने महंगाई की एक नई लहर को जन्म दिया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा प्रदान करता है, जो फिलहाल पूरी तरह ठप है।


उत्पादन बढ़ाने की वास्तविकता

विश्लेषक जॉर्ज लियोन के अनुसार, ओPEC+ देश अपने उत्पादन कोटे में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की वृद्धि कर सकते हैं। लेकिन असलियत यह है कि 21 सदस्य देशों में से केवल कुछ ही उत्पादन बढ़ाने की वास्तविक क्षमता रखते हैं।


उत्पादन में गिरावट

ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने से पहले ओPEC+ का दैनिक उत्पादन लगभग 4.3 करोड़ बैरल था, जो अब घटकर 3.3 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है। केपलर के डेटा के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यह उत्पादन इससे भी कम हो गया है।


यूएई का ओPEC छोड़ना

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ओPEC छोड़ने के निर्णय ने संगठन की ताकत को कमजोर कर दिया है। यूएई के पास तेल उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता है और वह ओPEC के कड़े नियमों से मुक्त होकर अधिक राजस्व प्राप्त करना चाहता है।


चीन का महत्व

विश्लेषक हुमायूं फलकशाही के अनुसार, इस समय तेल की कीमतों को और बढ़ने से रोकने वाला एकमात्र कारक चीन है। चीन अपनी सामान्य जरूरत से कम तेल खरीद रहा है और इस संकट के दौरान अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग कर रहा है।