NIA ने कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा के मामले में प्रमुख कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में शब्बीर अहमद शाह और अन्य का नाम शामिल है, जिन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच में यह सामने आया है कि इन नेताओं ने एक पूर्व-निर्धारित साजिश के तहत हिंसा को भड़काया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और NIA की जांच के निष्कर्ष।
Jul 10, 2026, 16:40 IST
श्रीनगर में चार्जशीट का मामला
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार को श्रीनगर में 1996 में हुई सामूहिक हिंसा और पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी के मामले में शब्बीर अहमद शाह सहित पांच अन्य प्रमुख कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ चार्जशीट पेश की। चार्जशीट में शब्बीर अहमद शाह के साथ-साथ सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील (जिसे मोहम्मद याकूब वकील के नाम से भी जाना जाता है), जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी का नाम शामिल है। ये सभी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता हैं। इन पर भारतीय दंड संहिता, 1989 के तहत आपराधिक साजिश, हत्या का प्रयास, दंगा करने और सरकारी कर्मचारियों पर हमले के आरोप लगाए गए हैं, साथ ही गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13 के तहत भी आरोप हैं।
आरोपियों की स्थिति
सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील के खिलाफ आरोप समाप्त हो गए हैं, क्योंकि कानूनी कार्यवाही के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। फिर भी, जम्मू में NIA की विशेष अदालत में दायर चार्जशीट में उनके द्वारा आपराधिक साजिश में भागीदारी और गैर-कानूनी भीड़ के साझा उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
जांच के निष्कर्ष
NIA की जांच के दौरान यह पता चला कि 17 जुलाई 1996 को श्रीनगर के नाज़ क्रॉसिंग पर मारे गए आतंकवादी हिलाल अहमद बेग के जनाज़े के जुलूस के दौरान, सभी छह आरोपियों ने एक गैर-कानूनी भीड़ का नेतृत्व किया और पुलिसकर्मियों के खिलाफ व्यापक हिंसा भड़काई। एनआईए ने एक बयान में कहा कि हथियारबंद आतंकवादी उस जुलूस में शामिल हुए थे, जिसकी अगुवाई आरोपी हुर्रियत नेता कर रहे थे। इस हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिससे कई पुलिस अधिकारी घायल हुए। इसके साथ ही, भारी पत्थरबाजी के कारण सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। इस मामले (RC-01/2026/NIA/JMU) में NIA की जांच के अनुसार, जिन हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उन्होंने भारत-विरोधी, पाकिस्तान-समर्थक और अलगाववादी नारे लगाकर हिंसा को भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। NIA ने यह भी पाया कि उन्होंने हथियारबंद संघर्ष का समर्थन करते हुए भड़काऊ भाषण दिए थे।
साजिश का उद्देश्य
आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने कहा कि उनकी गहन जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि "भीड़ की हिंसा हुर्रियत नेतृत्व की एक बड़ी, पूर्व-निर्धारित आपराधिक साजिश का हिस्सा थी। इस साजिश का उद्देश्य अंतिम संस्कार के जुलूस का उपयोग अलगाववादी विचारधारा को फैलाने, भारत सरकार के खिलाफ जनसमर्थन जुटाने, सार्वजनिक अव्यवस्था उत्पन्न करने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए करना था, साथ ही जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत की ताकत का प्रदर्शन करना भी था।