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NCR के लिए 'नमो सिटीज़' का विकास: संतुलित शहरीकरण की दिशा में एक कदम

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के लिए 'नमो सिटीज़' का विकास एक महत्वपूर्ण कदम है, जो संतुलित शहरीकरण को बढ़ावा देगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार ग्रीनफील्ड शहरों के निर्माण का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत NCR की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि की उम्मीद है, और यह नए आत्मनिर्भर शहरी केंद्रों के निर्माण पर केंद्रित है। जानें इस विकास के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

नमो सिटीज़ का विकास

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के लिए रीजनल प्लान 2041 के तहत संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए 'नमो सिटीज़' नाम से चार नए ग्रीनफील्ड शहरों का निर्माण किया जाएगा। यह निर्णय केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की बैठक में लिया गया। योजना के अनुसार, आने वाले दशकों में NCR में शहरीकरण की गति तेज़ी से बढ़ेगी; 2031 तक यहाँ की शहरी जनसंख्या लगभग 57% और 2041 तक लगभग 67% होने का अनुमान है।


मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए लाल ने बताया कि चार ग्रीनफील्ड शहरों का निर्माण किया जाएगा, जिन्हें 'नमो सिटी' के नाम से जाना जाएगा। इन शहरों के विकास के लिए ₹5,000 करोड़ की राशि आवंटित की जाएगी। राज्य सरकारें अपने प्रस्ताव भेजेंगी और एक प्रतियोगिता के माध्यम से इन शहरों का चयन किया जाएगा। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री भी शामिल हुए।


NCR को नए विकास मॉडल की आवश्यकता

NCR को नए ग्रोथ मॉडल की ज़रूरत क्यों है?


ड्राफ्ट योजना के अनुसार, NCR की जनसंख्या 2011 में 5.81 करोड़ से बढ़कर 2041 तक लगभग 11.3 करोड़ होने का अनुमान है। शहरीकरण की दर में तेजी आने की संभावना है क्योंकि अधिक लोग नौकरी और बेहतर अवसरों की तलाश में शहरों की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले कई दशकों से दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा ने इस विकास का अधिकांश हिस्सा अपने अंदर समाहित किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अब अपनी सीमाओं तक पहुँच चुका है।


नाइट फ्रैंक इंडिया की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित NCR रीजनल प्लान 2041 में हाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा सकता है, जिससे उत्तरी भारत के रियल एस्टेट मार्केट की दिशा भी बदल सकती है। यदि मौजूदा विकास की प्रवृत्ति जारी रही, तो 2030 तक दिल्ली-NCR दुनिया का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र बन सकता है।


नमो सिटीज़ का महत्व

नमो सिटीज़ क्यों ज़रूरी हैं?


चार ग्रीनफील्ड 'नमो सिटीज़' का विकास सबसे आकर्षक प्रस्तावों में से एक है। इसका उद्देश्य केवल नए टाउनशिप बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे आत्मनिर्भर शहरी केंद्रों का निर्माण करना है जो भविष्य में जनसंख्या वृद्धि को संभाल सकें और दिल्ली तथा अन्य भीड़-भाड़ वाले बाजारों पर दबाव कम कर सकें।


इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका

इंफ्रास्ट्रक्चर तय करेगा कामयाबी


हालांकि यह दृष्टिकोण बहुत बड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करने के तरीके से ही यह तय होगा कि NCR 2041 में सफल होगा या नहीं। एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) में क्रेन डिवीज़न के CEO मनीष माथुर ने कहा कि यह क्षेत्र 55,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैला है और उम्मीद है कि 2041 तक यहाँ 11 करोड़ से अधिक लोग निवास करेंगे। इस विशाल विकास को समर्थन देने के लिए ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स हब, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की आवश्यकता होगी।