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NASA और ISRO का संयुक्त मिशन: निसार उपग्रह से मिली अद्वितीय रडार छवि

NASA और ISRO के संयुक्त मिशन निसार ने लुइसियाना के मिसिसिपी नदी डेल्टा क्षेत्र की एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन रडार छवि प्रस्तुत की है। यह उपग्रह आपदा प्रबंधन, कृषि और वनों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निसार का डेटा वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकता है। जानें इस उपग्रह की तकनीक और इसके संभावित लाभों के बारे में।
 

उपग्रह से मिली अद्वितीय रडार छवि

नासा ने हाल ही में जानकारी दी है कि अमेरिका-भारत के एनआईएसएआर पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह द्वारा प्राप्त उच्च-रिज़ॉल्यूशन रडार छवि ने दक्षिणपूर्वी लुइसियाना के मिसिसिपी नदी डेल्टा क्षेत्र का विस्तृत चित्रण किया है। इस छवि ने अमेरिका के जटिल भू-भागों में शहरी क्षेत्रों, आर्द्रभूमि, वनों और कृषि भूमि के सूक्ष्म विवरणों को उजागर किया है। निसार, जो नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक संयुक्त प्रयास है, पृथ्वी विज्ञान और उपग्रह अनुसंधान में अमेरिका-भारत के दीर्घकालिक सहयोग का प्रतीक है। इस छवि की स्पष्टता इतनी है कि इसमें लेक पोंटचार्ट्रेन कॉज़वे को आसानी से पहचाना जा सकता है, जो केंद्र के दाईं ओर स्थित है। ये पुल लगभग 24 मील (39 किलोमीटर) तक फैले हुए हैं, जो इन्हें जल के ऊपर बना सबसे लंबा निरंतर पुल बनाता है।


निसार उपग्रह की तकनीक

एल बैंड माइक्रोवेव तरंगों पर आधारित निसार

निसार उपग्रह में बैड रेडार माइक्रोवेव तरंगों का उपयोग किया गया है। यह लगभग 24 सेंटीमीटर की तरंगों के माध्यम से बादलों को पार करता है और नीचे की सतह, पेड़ों, इमारतों और जल की सतह से टकराकर वापस सैटलाइट तक पहुंचता है। इसी डेटा का उपयोग करके रंगीन और सटीक नक्शे बनाए जाते हैं। निसार को 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा।


आपदा प्रबंधन और कृषि में निसार का योगदान

नासा के अनुसार, निसार का डेटा आपदा प्रबंधन, कृषि, वनों की निगरानी और आर्द्रभूमियों की सुरक्षा में अत्यधिक सहायक होगा। यह डेटा वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकता है। यह उपग्रह हर 12 दिन में दो बार धरती की सतह, पर्वतों और बर्फीले क्षेत्रों की निगरानी करता है।