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LoC पर दो अलग-अलग हकीकतें: PoK में अशांति और भारत में विकास

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और भारत में हो रहे विकास के बीच एक स्पष्ट अंतर है। जहां PoK में हिंसा और दमन का माहौल है, वहीं भारतीय क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास और आर्थिक समृद्धि का जश्न मनाया जा रहा है। इस लेख में हम इन दोनों क्षेत्रों की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण करेंगे, जो 1947 से विभाजित हुए कश्मीर की दो भिन्न वास्तविकताओं को उजागर करता है।
 

LoC पर दो विपरीत परिदृश्य

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के दोनों ओर हालिया घटनाएं 1947 में विभाजित हुए भूभाग की दो भिन्न वास्तविकताओं को उजागर करती हैं। एक ओर, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हिंसा और दमन का माहौल है, जबकि दूसरी ओर, भारतीय क्षेत्र में विकास और आर्थिक समृद्धि का जश्न मनाया जा रहा है।


इस विकास का एक उदाहरण ज़ोजिला टनल है, जो एशिया की सबसे लंबी द्विदिशात्मक टनल बनने जा रही है। यह टनल जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ते हुए हर मौसम में खुली रहेगी। यह तुलना केवल घटनाओं की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग शासन व्यवस्थाओं की कहानी भी बयां करती है।


PoK में दमन और हिंसा

9 जून को, PoK के प्रमुख शहरों जैसे रावलकोट, मुज़फ़्फ़राबाद और मीरपुर में भारी अशांति देखी गई। प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा आयोजित 'लॉन्ग मार्च' को रोकने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने कठोर कदम उठाए। रावलकोट में हुई झड़पों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 11 लोगों की मौत हुई, जबकि स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह संख्या अधिक हो सकती है।


पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।


PoK में वर्षों से चल रहा संघर्ष

2024 में, आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें चार कश्मीरियों की जान गई। 2025 में, JAAC के नेतृत्व में व्यापक हड़ताल हुई, जिसमें 12 लोग मारे गए। 2026 में, पंजाब-नियंत्रित प्रशासन ने विधानसभा में गैर-निवासियों के लिए सीटें आरक्षित कीं, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ा।


LoC के दोनों ओर हो रही ये घटनाएं कश्मीर के दो हिस्सों के अलग-अलग रास्तों को दर्शाती हैं।


भारत में बुनियादी ढांचे का विकास

दूसरी ओर, भारत ने 13.15 किलोमीटर लंबी ज़ोजिला टनल का निर्माण पूरा किया है, जो बुनियादी ढाँचे के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह टनल लद्दाख के दूरदराज के क्षेत्रों को सर्दियों में भी जोड़ने में मदद करेगी।


पिछले एक दशक में, जम्मू-कश्मीर में हाईवे, टनल, रेलवे और पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढाँचे में लगातार निवेश किया गया है।


कश्मीर में बदलाव और विकास

जम्मू-कश्मीर में पिछले दशक में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद, निवेश में वृद्धि हुई है। 2025-26 में, जम्मू-कश्मीर प्रशासन को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।


बेहतर सड़क, रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को बदलने में मदद की है।


सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति

केंद्र सरकार ने बार-बार कहा है कि जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश होना अस्थायी है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा है कि सही समय पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा।


हालांकि, PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और भारत में हो रहे विकास के बीच का अंतर स्पष्ट है।


9 जून की घटनाएं

9 जून को, जब PoK में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल आमने-सामने थे, वहीं भारत में ज़ोजिला टनल के निर्माण का जश्न मनाया जा रहा था। यह स्थिति कश्मीर के दोनों हिस्सों के बीच के स्पष्ट अंतर को दर्शाती है।