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KGMU में दवाओं के घोटाले की जांच तेज, सात विभागों में ऑडिट शुरू

लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मरीजों के इलाज में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। नेत्र रोग विभाग में बाहरी दवाओं के उपयोग और कार्डियोलॉजी में एक मरीज को पांच स्टेंट लगाने के मामलों की जांच चल रही है। यूरोलॉजी विभाग में कैंसर दवाओं के घोटाले का मामला भी उजागर हुआ है। प्रशासन ने इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच को तेज कर दिया है और सात विभागों में ऑडिट शुरू किया है। जानें इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है।
 

लखनऊ KGMU में अनियमितताओं का मामला

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मरीजों के उपचार और सरकारी योजनाओं के तहत दवाओं में अनियमितताओं की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। नेत्र रोग विभाग में बाहरी दवाओं के उपयोग, कार्डियोलॉजी में एक मरीज को पांच स्टेंट लगाने और यूरोलॉजी विभाग में कैंसर दवाओं के घोटाले के मामलों में प्रशासन ने जांच को तेज कर दिया है। कई डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि कुछ विभागों में ऑडिट का दायरा बढ़ाया जा रहा है.


नेत्र रोग विभाग में कार्रवाई

नेत्र रोग विभाग में मरीजों को बाहरी दवाएं, लेंस और उपकरण खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। जांच समिति की सिफारिश पर डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित किया गया है। जांच में 30 मरीजों की जानकारी ली गई, जिनमें से 17 ने बयान दर्ज कराए और सबूत भी प्रस्तुत किए। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर के कहने पर ओपीडी में एक कर्मचारी उन्हें निश्चित मेडिकल स्टोर की पर्ची देता था। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों से हजारों रुपए वसूले गए.


कार्डियोलॉजी विभाग में अनियमितता

KGMU के कार्डियोलॉजी विभाग में एक ही मरीज को पांच स्टेंट लगाने का मामला सामने आया है। कुलपति डॉ. नित्यानंद ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। प्रारंभिक जांच में 15 मरीजों का विवरण एकत्र किया गया है, जो सभी आयुष्मान योजना के तहत भर्ती थे। समिति एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी रिपोर्ट और स्टेंट लगाने की चिकित्सीय आवश्यकता की विस्तृत जांच करेगी.


यूरोलॉजी विभाग में कैंसर दवा घोटाला

यूरोलॉजी विभाग में सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें असाध्य रोग योजना के तहत पंजीकृत मरीजों के यूएचआईडी नंबरों का दुरुपयोग कर महंगी कैंसर दवाओं की कथित कालाबाजारी की गई। जांच में पाया गया कि विभाग में खरीदी गई दवाओं का लगभग 90% कैंसर की दवाएं थीं। जब जांच शुरू हुई, तो विभाग की अलमारी से 15 लाख रुपए की दवाएं बरामद हुईं, जो कोल्ड चेन का पालन किए बिना रखी गई थीं.


जांच का दायरा बढ़ा

यूरोलॉजी घोटाले के बाद प्रशासन ने सात कैंसर संबंधी विभागों में दवा खरीद, आपूर्ति और भुगतान का ऑडिट शुरू कर दिया है। इनमें रेडियोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, इंडोक्राइन सर्जरी और स्त्री रोग विभाग शामिल हैं। KGMU प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है.