ISRO ने सफलतापूर्वक पूरा किया दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट, गगनयान मिशन की तैयारी जारी
ISRO का एयर ड्रॉप टेस्ट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 10 अप्रैल को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अपने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस परीक्षण में, एक नकली क्रू मॉड्यूल, जो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए डिज़ाइन किया गया है, भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाया गया और इसे समुद्र में एक निर्धारित ड्रॉप ज़ोन के ऊपर गिराया गया। इस क्रू मॉड्यूल का वजन लगभग 5.7 टन है, जो पहले के गगनयान मिशन (G1) में उपयोग किए गए मॉड्यूल के वजन के बराबर है।
परीक्षण की प्रक्रिया
आईएडीटी के अंतर्गत, एक डमी क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के भारी विमानों या हेलीकॉप्टरों से कई किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि पैराशूट सही समय पर और बिना किसी तकनीकी समस्या के खुलते हैं। हाल ही में संपन्न आईएडीटी-02 परीक्षण की सफलता इस बात का प्रमाण है कि ISRO का पैराशूट और रिकवरी सिस्टम पूरी तरह से विश्वसनीय है, जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी को सुनिश्चित करेगा।
गगनयान मिशन की प्रगति
सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के लिए लगभग ₹100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में है, और पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में होने की संभावना है। इससे पहले, 8 अप्रैल को ISRO के अध्यक्ष वी नारायण ने बताया था कि मानव रहित गगनयान मिशन की सभी तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और अंतिम मानवयुक्त प्रक्षेपण से पहले तीन मानव रहित मिशन होंगे।