IRCTC ने टिकट दलालों के खिलाफ AI का किया इस्तेमाल, जानें क्या हैं नए नियम
IRCTC का डिजिटल अभियान
भारतीय रेलवे का टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म IRCTC ने टिकट दलालों और अवैध सॉफ्टवेयर के खिलाफ एक नई डिजिटल मुहिम शुरू की है। अब आपकी टिकट बुकिंग प्रक्रिया पर न केवल इंसान की नजर होगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी इसकी निगरानी करेगा। यदि आप तत्काल टिकट बुक करते समय कुछ चालाकी से काम लेते हैं, तो सावधान रहें; आपकी एक छोटी सी गलती आपकी आईडी को स्थायी रूप से ब्लॉक कर सकती है।
AI की निगरानी
IRCTC का नया AI सिस्टम अब यह देख रहा है कि आप फॉर्म भरने में कितना समय ले रहे हैं। यदि किसी यात्री को जानकारी भरने में केवल 4 से 5 सेकंड लगते हैं, तो AI इसे संदिग्ध मानता है। आमतौर पर, एक व्यक्ति को नाम, उम्र और अन्य विवरण भरने में इससे अधिक समय लगता है। 4.2 सेकंड जैसी गति केवल ऑटो-फिल सॉफ्टवेयर या स्क्रिप्ट के माध्यम से संभव है, जिसे पहचानते ही AI सिस्टम उस खाते को संदिग्ध श्रेणी में डाल देता है.
गलतियों से बचने के उपाय
- कट-पेस्ट और ऑटो-फिल का उपयोग: यदि आप विवरण भरने के लिए कट-पेस्ट या ऑटो-फिल टूल्स का सहारा लेते हैं, तो AI इसे तुरंत पहचान लेगा।
- स्क्रिप्ट आधारित बुकिंग: अवैध सॉफ्टवेयर या कोडिंग स्क्रिप्ट का उपयोग अब असंभव होगा।
- असामान्य टाइपिंग पैटर्न: आपकी टाइपिंग गति और तरीका भी अब ट्रैक किया जाएगा।
लॉगिन पैटर्न और डिवाइस ट्रैकिंग
केवल बुकिंग ही नहीं, बल्कि आपके लॉगिन करने के तरीके पर भी सख्ती बरती गई है। यदि कोई उपयोगकर्ता बार-बार लॉगिन और लॉगआउट करता है, तो उस पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके अलावा, AI आपके मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और डिवाइस पैटर्न को भी ट्रैक कर रहा है। यदि एक ही डिवाइस या आईपी से कई संदिग्ध गतिविधियाँ पाई जाती हैं, तो सिस्टम उसे 'रेड फ्लैग' के रूप में चिन्हित करेगा.
यात्रियों को मिलने वाले लाभ
इस AI मुहिम का मुख्य उद्देश्य असली यात्रियों को तत्काल टिकट उपलब्ध कराना है। दलालों द्वारा ऑटो-सॉफ्टवेयर के माध्यम से टिकटों को तेजी से बुक करने के कारण आम लोगों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता था। अब AI की निगरानी से दलालों पर नियंत्रण होगा और यात्रियों को बेहतर सेवा और सुविधाएँ मिल सकेंगी.