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भारत-रूस संबंधों में नई गति: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी

भारत और रूस के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, खासकर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में। राष्ट्रपति पुतिन का संभावित दौरा और मोदी की रूस यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार में बदलाव के बीच, भारत और रूस अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं। जानें कैसे ये घटनाएँ वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
 

भारत और रूस के बीच कूटनीतिक गतिविधियों में तेजी

भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और वैश्विक परिवर्तनों के बीच, भारत और रूस के संबंधों में महत्वपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर में भारत का दौरा कर सकते हैं। यदि यह यात्रा होती है, तो यह नौ महीनों में उनका दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले, वे दिसंबर 2025 में वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे.


ब्रिक्स सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठक

भारत इस वर्ष ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और सितंबर में शिखर सम्मेलन आयोजित करने की योजना है। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की भी उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, मई में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भारत में होगी, जिसमें रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के विदेश मंत्री वांग यी भाग लेंगे। यह बैठक उस समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, और भारत इस मुद्दे पर ब्रिक्स देशों के बीच एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास कर रहा है.


पश्चिम एशिया में तनाव और भारत-रूस वार्ता

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, विशेषकर अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के टकराव ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। हाल ही में, भारत और रूस के बीच विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत हुई, जिसमें दोनों देशों ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की। इस बातचीत में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई और उच्चस्तरीय दौरों की रूपरेखा पर भी विचार किया गया.


ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव

ऊर्जा क्षेत्र में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। पहले इस छूट के कारण भारतीय रिफाइनर सस्ते दाम पर रूसी तेल खरीद पा रहे थे, लेकिन अब आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है.


भारत-रूस संबंधों की व्यापकता

भारत और रूस के संबंध केवल ऊर्जा या रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक और बहुआयामी साझेदारी है। हाल ही में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दोनों देशों के विशेषज्ञों ने द्विपक्षीय संबंधों के नए एजेंडे पर चर्चा की। इस दौरान वैश्विक आर्थिक बदलाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी मित्रता समानता, आपसी विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है.


आर्थिक सहयोग में प्रगति

आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग साठ अरब डॉलर तक पहुंच गया है, और लक्ष्य इसे 2030 तक सौ अरब डॉलर तक बढ़ाना है। इसके लिए परिवहन, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में नए प्रयास किए जा रहे हैं.


वैश्विक मंचों पर सहयोग

इसके अलावा, भारत और रूस संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन और जी20 जैसे मंचों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देश वैश्विक व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित बनाने के लिए समान दृष्टिकोण साझा करते हैं.


भविष्य की संभावनाएँ

आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे की संभावना भी है, जिससे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और मजबूत होगा। पुतिन का संभावित भारत दौरा और मोदी की प्रस्तावित रूस यात्रा इस साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.


निष्कर्ष

वर्तमान वैश्विक तनाव और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच, भारत और रूस अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस सहयोग को नई गति देने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है, जहां वैश्विक मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने की कोशिश होगी.