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Hantavirus: नया खतरनाक वायरस, कोविड-19 से भी अधिक गंभीर

Hantavirus, एक नया और खतरनाक वायरस, कोविड-19 से भी अधिक गंभीरता के साथ सामने आया है। हाल ही में एक क्रूज शिप पर इसके संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। WHO ने इस वायरस की गंभीरता को स्वीकार किया है, लेकिन इसके तेजी से फैलने की संभावना कम बताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों से फैलता है। जानें इसके लक्षण, संक्रमण के तरीके और इससे बचने के उपाय।
 

Hantavirus का खतरा


कोविड-19 के बाद, देश में एक नया वायरस सामने आया है, जिसे Hantavirus कहा जाता है। यह वायरस कोरोना वायरस से भी अधिक खतरनाक माना जा रहा है। हाल ही में, अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर इसके संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिसमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से फैलता नहीं है, लेकिन इसकी गंभीरता और उच्च मृत्यु दर इसे खतरनाक बनाती है। WHO के अधिकारियों के अनुसार, यह वायरस सामान्य वायरल संक्रमणों से भिन्न तरीके से फैलता है।


डच क्रूज शिप MV Hondius इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। यह जहाज अर्जेंटीना से यात्रा पर निकला था और इसमें लगभग 150 यात्री थे। यात्रा के दौरान, जहाज अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरा। इसी दौरान, एक बुजुर्ग यात्री में बुखार, सिरदर्द और दस्त जैसे लक्षण दिखाई दिए, और उनकी हालत बिगड़ने पर जहाज पर ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी और एक अन्य महिला यात्री की भी जान चली गई।


WHO के अनुसार, अब तक पांच पुष्ट और तीन संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। संक्रमण के मामलों के बाद, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, ब्रिटेन और अन्य देशों में सतर्कता बढ़ा दी गई है.



विशेषज्ञों के अनुसार, हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों के संपर्क से फैलता है। संक्रमित जानवरों के मल, मूत्र या लार से यह वायरस इंसानों में पहुंच सकता है। कभी-कभी, संक्रमित धूल सांस के जरिए भी शरीर में चली जाती है। यह वायरस दो प्रमुख प्रकारों में पाया जाता है: यूरोप और एशिया में मिलने वाला वैरिएंट किडनी को प्रभावित करता है, जबकि अमेरिका में पाया जाने वाला वैरिएंट फेफड़ों पर गंभीर असर डालता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है।


WHO ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और उचित उपचार से इस वायरस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।