FCRA बिल पर संसद में गतिरोध, सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद जारी
संसद में FCRA बिल पर विवाद
संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' (FCRA बिल) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे गतिरोध बना हुआ है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बिल को गुरुवार को संसद में पेश करने की संभावना बहुत कम है। सरकार और विपक्ष के बीच इस संशोधन की शर्तों पर गहरा मतभेद है। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में NEET प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के बारे में लोकसभा में बयान देने की मांग की है।
सरकार का रुख
सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि बिल को लोकसभा में तभी पेश किया जाए जब सभी तथ्य सदन के सामने हों और उस पर उचित बहस हो सके। सरकार का उद्देश्य इसे हंगामे के बीच नहीं, बल्कि व्यापक सहयोग से पारित कराना है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
बुधवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क किया और संसद के मौनसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सहयोग मांगा। यह पिछले 10 दिनों में गांधी से उनकी दूसरी मुलाकात थी। हालांकि, गांधी ने रिजिजू को कोई आश्वासन नहीं दिया। कांग्रेस नेताओं ने इस बिल को 'कठोर' बताते हुए कहा है कि वे इसे मौजूदा रूप में पारित नहीं होने देंगे।
FCRA बिल का महत्व
FCRA एक्ट यह निर्धारित करता है कि भारतीय नागरिक, गैर-सरकारी संगठन (NGO), ट्रस्ट, एसोसिएशन और कंपनियां विदेश से भेजे गए पैसे, सामान या सेवाओं को कैसे प्राप्त और उपयोग कर सकती हैं। यह उन गतिविधियों पर रोक लगाता है जो भारत की संप्रभुता या सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
सरकार का तर्क
सरकार ने कहा है कि संशोधन में विदेशी फंडिंग वाली संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक निश्चित प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, यह विदेशी चंदे के गलत इस्तेमाल को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास है।
विपक्ष का विरोध
विपक्षी नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन NGO की स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है और इससे सरकार को उनकी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल सकता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह सोच कि RSS कुछ भी कर सकता है जबकि अन्य NGO नहीं, अस्वीकार्य है।
आगे की रणनीति
सरकार को FCRA बिल को पास कराने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता है, लेकिन विपक्षी दलों ने मौजूदा रूप में इसका समर्थन नहीं करने की बात कही है। अब यह देखना है कि सरकार इस बिल को पास कराने के लिए क्या रणनीति अपनाती है। संसद का मौनसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा।