भारत की वायुसेना को मिलेगी नई ताकत: राफेल विमानों की खरीद का बड़ा सौदा
राफेल विमानों की खरीद से बढ़ेगी वायुसेना की ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेनाओं को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से सुसज्जित करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनकी नीति के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए शक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण है। इसी दृष्टिकोण के तहत, भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। राफेल लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने की हालिया पहल से वायुसेना की कमजोर होती स्क्वाड्रन ताकत को मजबूती मिलेगी और भारत को सामरिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बढ़त प्राप्त होगी।
रक्षा खरीद बोर्ड की मंजूरी
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद बोर्ड ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। यह मंजूरी औपचारिक प्रक्रिया का पहला चरण है, जिसके बाद प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद के समक्ष जाएगा और अंततः प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति से अंतिम स्वीकृति प्राप्त करेगा। इस सौदे की अनुमानित लागत लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये है, जो भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बन सकता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति का भारत दौरा
यह मंजूरी उस समय आई है जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत का दौरा करने वाले हैं। यदि मूल्य वार्ता और अन्य स्वीकृतियां समय पर पूरी होती हैं, तो दोनों देशों के बीच अंतर सरकारी समझौते के तहत सौदे पर हस्ताक्षर संभव हैं। इस मॉडल में बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होगी, जिससे सीधे आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
भारतीय वायुसेना की वर्तमान स्थिति
भारतीय वायुसेना पहले से ही 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है, और नौसेना ने इसी श्रेणी के 26 समुद्री संस्करण मंगाए हैं। नए सौदे के तहत 18 विमान सीधे उड़ान के लिए तैयार मिलेंगे, जबकि शेष का निर्माण भारत में किया जाएगा। नागपुर में डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस में अंतिम संयोजन लाइन स्थापित की जा रही है, जहां भारतीय कंपनियां जैसे टाटा, महिंद्रा और डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज साझेदार बनेंगी।
भारत की शर्तें और तकनीकी हस्तांतरण
इस सौदे में भारत ने कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं, जिनमें सभी विमानों पर भारतीय हथियारों और मिसाइलों का एकीकरण, सुरक्षित डेटा लिंक और एयरफ्रेम, इंजन तथा एवियोनिक्स में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल हैं। राफेल के उन्नत F-4 और भविष्य के F-5 संस्करणों की मांग भी की गई है, जो नई पीढ़ी के एईएसए रडार, बेहतर आत्म सुरक्षा प्रणाली, लंबी दूरी की मारक क्षमता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायता से लैस होंगे।
वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या में कमी
वर्तमान में वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पुराने मिग-21 विमानों की विदाई और तेजस परियोजना में देरी ने इस कमी को और बढ़ा दिया है। चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों की चुनौतियों ने इस खरीद को अनिवार्य बना दिया है।
राफेल विमानों की बहु भूमिका क्षमता
राफेल की बहु भूमिका क्षमता, गहरी मार, नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमता और सटीकता भारतीय वायुसेना को आवश्यक धार प्रदान करती है। यह विमान हवा में प्रभुत्व स्थापित करने के साथ-साथ जमीनी ठिकानों पर सर्जिकल वार और समुद्री क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत का निर्माता बनने का सपना
इस सौदे का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भारत केवल उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि निर्माता बनेगा। एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से भारतीय उद्योग को मजबूती मिलेगी। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ठोस आधार प्रदान करता है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए आवश्यक कौशल और बुनियादी ढांचा तैयार करता है।
सामरिक परिदृश्य पर प्रभाव
इसका सामरिक प्रभाव दूरगामी होगा। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स और पाकिस्तान की वायुसेना को अब ऐसे प्रतिद्वंद्वी का सामना करना होगा, जो तकनीकी स्तर पर उनसे आगे है। राफेल की तैनाती से भारत की निवारक क्षमता मजबूत होगी और किसी भी दुस्साहस की कीमत दुश्मन के लिए असहनीय होगी। यह सौदा भारत के संप्रभु निर्णय का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।