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भारत की रक्षा में अंतरिक्ष की भूमिका: डीआरडीओ प्रमुख का बयान

डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने हाल ही में कहा कि अंतरिक्ष अब राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। संगोष्ठी में कामत ने डीआरडीओ की बढ़ती भूमिका और अकादमिक संस्थानों तथा स्टार्टअप्स के सहयोग की बात की। जानें इस क्षेत्र में भारत की भविष्य की योजनाएं और चुनौतियाँ।
 

अंतरिक्ष: राष्ट्रीय सुरक्षा का नया आयाम

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने हाल ही में कहा कि आज अंतरिक्ष केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का एक सहायक तत्व नहीं रह गया है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है जो भविष्य के संघर्षों के परिणामों को प्रभावित करेगा। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में सुधार के लिए एक समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि प्रतिकूल देशों के अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से विकसित हो रहे हैं।


भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी में विचार

मानेकशॉ सेंटर में आयोजित चौथे भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी में, कामत ने भारत के रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ की सैन्य अंतरिक्ष में भूमिका बढ़ रही है और इस क्षेत्र में पिछड़ने से बचने के लिए अधिक निवेश और सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम इसरो द्वारा संचालित होता है, जबकि रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के गठन के बाद, डीआरडीओ को सैन्य पहलुओं का प्रबंधन सौंपा गया है।


डीआरडीओ की नई पहलें

कामत ने बताया कि यह जिम्मेदारी अभी डीआरडीओ के कार्यों का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन यह तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि हमें अपने प्रतिकूल देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है, तो इस क्षेत्र में और अधिक विकास की आवश्यकता है। इस अंतर को पाटने के लिए, डीआरडीओ ने एक सहयोगात्मक मॉडल अपनाया है जिसमें स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्यम और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। संगठन ने पहले ही अपने 15 डीआईए उत्कृष्टता केंद्रों में से तीन से चार में डीआरडीओ उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर लिए हैं, जिनमें अंतरिक्ष को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में चुना गया है।


अकादमिक संस्थानों और स्टार्टअप्स की भूमिका

कामत ने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान देने के लिए अकादमिक संस्थानों और स्टार्टअप्स में काफी रुचि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अगले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आवश्यक गति और संप्रभु क्षमताएं हासिल कर लेगा।