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बिहार के स्कूल में मिड-डे मील खाने से बच्चों की तबियत बिगड़ी

बिहार के पारसी मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए। रसोइये द्वारा गलती से डिटर्जेंट पाउडर मिलाने के कारण बच्चों को उल्टी और चक्कर आने लगे। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन तैयारी पर सवाल उठाए हैं। परिवारों ने अस्पताल में सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया है।
 

बिहार के स्कूल में मिड-डे मील से बच्चों की तबियत खराब

Source:  @MahuaMoitraFans/X


पटना, 19 अगस्त: मंगलवार को नूरसराय पुलिस थाना क्षेत्र के पारसी मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों ने खाना खाने के बाद उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की, जिसमें गलती से रसोइये द्वारा डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया गया था।


सभी बच्चों को इलाज के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया।


सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने अस्पताल जाकर बच्चों की स्थिति की जांच की और बताया कि सभी बच्चे सुरक्षित हैं।


विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेन्द्र कुमार सिंह के अनुसार, मंगलवार को परोसा गया मिड-डे मील चावल और सोयाबीन की डिश थी।


खाने में नमक की कमी की शिकायत के बाद, रसोइये ने गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर सर्फ डाल दिया।


रिपोर्ट के अनुसार, रसोई में नमक और डिटर्जेंट एक ही स्थान पर रखे गए थे।


खाना खाने के थोड़ी देर बाद, बच्चों ने उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की। स्कूल में प्राथमिक उपचार की कोशिश की गई, लेकिन जब उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें सदर अस्पताल भेजा गया।


अस्पताल में बच्चों की बड़ी संख्या के पहुंचने के बाद, उनके परिवार वाले भी वहां इकट्ठा हो गए।


परिवारों ने अस्पताल में सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया, यह बताते हुए कि एक ही बिस्तर पर दो या तीन लड़कियों का इलाज किया जा रहा था।


इससे थोड़ी हलचल हुई, लेकिन बाद में सिविल सर्जन ने बेहतर इलाज का आश्वासन दिया, जिससे स्थिति शांत हो गई।


इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन तैयारी पर भी सवाल उठाए हैं।


परिवारों ने आरोप लगाया कि बच्चों के बीमार होने की सूचना देने के बावजूद, न तो नूरसराय अस्पताल से एंबुलेंस भेजी गई और न ही कोई चिकित्सा टीम स्कूल पहुंची।


एंबुलेंस की अनुपलब्धता के कारण, परिवारों को बच्चों को ई-रिक्शा और टेम्पो से सदर अस्पताल ले जाना पड़ा।


परिवारों ने कहा कि यदि स्थानीय अस्पताल से समय पर एंबुलेंस और चिकित्सा टीम पहुंची होती, तो बच्चों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सकती थी।


अब मिड-डे मील योजना की निगरानी और बिहार में स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली की आपातकालीन प्रतिक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।