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CJI सूर्यकांत ने हिंसा की जांच के लिए स्वतंत्रता और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा जो निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का संकेत दिया है, जो दिल्ली और अन्य राज्यों में हुई हिंसा की घटनाओं की जांच करेगी। सीजेआई ने यह भी कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और सभी संबंधित पक्षों को रचनात्मक सुझावों के साथ आगे आना चाहिए।
 

सीजेआई का बयान: कानून करेगा कार्रवाई

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जो भी अपनी सीमाओं का उल्लंघन करेगा और निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करेगा, उसके खिलाफ कानून उचित कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता है। यदि जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तो ऐसी जांच का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगा, जो दिल्ली और अन्य राज्यों में हुई हिंसा की घटनाओं की जांच करेगी।


जांच की प्रक्रिया पर सीजेआई की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने कहा कि इस मामले की गहन जांच आवश्यक है और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच की प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, और इसकी संरचना की घोषणा बाद में की जाएगी। यह टिप्पणी उस समय की गई जब सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को 'संसद मार्च' के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य के प्रदर्शनों के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।


याचिकाओं में उठाए गए आरोप

सीजेआई ने कहा कि याचिकाओं में कई प्रकार के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि एक बड़ा मुद्दा पैलेट गन के उपयोग से संबंधित है, जिसके कारण एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चली गई। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक बैटन के उपयोग की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसमें एक युवती को ICU में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में मीडियाकर्मियों पर हमले के आरोप भी हैं, जिसमें एक पत्रकार को बेरहमी से पीटा गया। इसके अलावा, सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा करने के आरोप भी लगाए गए हैं।


शांतिपूर्ण प्रदर्शन का महत्व

सीजेआई ने कहा कि यह छात्रों का एक पूरी तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें कुछ मांगें उठाई गई थीं। उन्होंने टिप्पणी की कि इसके लिए विस्तृत तर्कों की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में था। उनका मानना है कि ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में कभी-कभी अनपेक्षित तत्व शामिल हो जाते हैं, जो अपने एजेंडे के साथ आते हैं। छात्रों ने कहा कि अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करने के बावजूद उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। सभी संबंधित पक्षों को रचनात्मक सुझावों के साथ आगे आना चाहिए।