CDS जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि का सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बयान
सुरक्षा सभा में CDS का संबोधन
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने हाल ही में सुरक्षा सभा में राष्ट्रीय सुरक्षा और बदलते युद्धक्षेत्र पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि आज के युद्ध केवल एक मोर्चे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें जमीन, समुद्र, हवा के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना के क्षेत्र भी शामिल हैं।
मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की आवश्यकता
CDS ने कहा कि भविष्य के संघर्षों में विभिन्न सैन्य क्षेत्रों का समन्वय आवश्यक होगा। उनके अनुसार, केवल तीनों सेनाओं के बीच सहयोग पर्याप्त नहीं है, बल्कि मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
रक्षा मंत्रालय ने भी हाल के कार्यक्रमों में मल्टी-डोमेन संघर्ष की तैयारी और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया है।
युद्ध का स्वरूप बदल रहा है
जनरल सुब्रमणि ने बताया कि आधुनिक समय में शांति और युद्ध के बीच की पारंपरिक रेखा तेजी से धुंधली हो रही है। आर्थिक दबाव, साइबर गतिविधियां और सूचना अभियान भी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसका अर्थ यह है कि किसी देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर सैनिकों की तैनाती से तय नहीं होती, बल्कि तकनीकी क्षमता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
AI और डेटा का महत्व
CDS ने आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित निर्णय लेने की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि सही जानकारी को समय पर पहचानना और उसके आधार पर निर्णय लेना चुनौती है।
रक्षा मंत्रालय के Future Warfare Course में भी AI, साइबर क्षमताओं और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को भविष्य के संघर्षों के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा गया है।
युद्धक्षेत्र में तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता
CDS ने युद्धक्षेत्र में बढ़ती पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए कहा कि निगरानी तकनीक और सेंसर के कारण घटनाओं की जानकारी तेजी से मिलती है। ऐसे में जिस पक्ष के पास बेहतर जानकारी और तेज निर्णय लेने की क्षमता होगी, उसे रणनीतिक लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का महत्व केवल दूर तक देखने में नहीं, बल्कि उपलब्ध जानकारी को समझने और उसका प्रभावी उपयोग करने में है।
सैन्य तालमेल की आवश्यकता
CDS ने जॉइंटनेस को भविष्य की सैन्य तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनका कहना है कि जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
भारत में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन के लिए पहले से ही प्रशिक्षण और रणनीतिक चर्चाएं चल रही हैं।
आत्मनिर्भरता और लॉजिस्टिक्स
CDS ने तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय लचीलेपन को सुरक्षा तैयारियों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि लंबे संकट के दौरान किसी देश की क्षमता केवल हथियारों से नहीं, बल्कि उसकी आपूर्ति व्यवस्था और औद्योगिक क्षमता से भी प्रभावित होती है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का उद्देश्य महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए बाहरी निर्भरता को कम करना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक जिम्मेदारी
CDS ने राष्ट्रीय सुरक्षा को एक व्यापक जिम्मेदारी बताया और सरकार, उद्योग, तकनीकी क्षेत्र, अकादमिक संस्थानों और समाज की भूमिका पर जोर दिया।
उनके अनुसार, बदलते सुरक्षा वातावरण में भारत को ऐसी तैयारी की आवश्यकता है जो पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के साथ नई तकनीकों को भी शामिल कर सके।
भविष्य के युद्ध की तैयारी
CDS का मुख्य संदेश यह था कि भविष्य के संघर्ष पहले की तुलना में अधिक जटिल और बहु-क्षेत्रीय हो सकते हैं। ऐसे में जमीन, समुद्र, हवा, साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना क्षेत्रों में समन्वित तैयारी आवश्यक होगी।
भारत के लिए चुनौती केवल नई तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि तीनों सेनाओं और अन्य राष्ट्रीय संसाधनों को एक व्यापक सुरक्षा ढांचे में जोड़ने की भी है।