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Air India को वित्तीय संकट का सामना, 7 मई को महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक

Air India, टाटा ग्रुप की एयरलाइन, वर्तमान में गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है, जिसमें ₹22,000 करोड़ का घाटा शामिल है। 7 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग में लागत में कटौती, नेतृत्व में बदलाव और नए CEO की नियुक्ति पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती लागत ने एयरलाइन की स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इस संकट का असर केवल Air India तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर पर भी पड़ रहा है।
 

Air India की वित्तीय चुनौतियाँ

टाटा ग्रुप की एयरलाइन Air India वर्तमान में गंभीर वित्तीय समस्याओं का सामना कर रही है। कंपनी को वित्त वर्ष 2026 तक ₹22,000 करोड़ से अधिक का घाटा हो चुका है। इस स्थिति में, 7 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें लागत में कटौती, नेतृत्व में बदलाव और भविष्य की रणनीति पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं.


बोर्ड मीटिंग की जानकारी

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की अध्यक्षता में मुंबई में आयोजित की जाएगी। इसमें FY26 के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के साथ-साथ खर्च कम करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, नए CEO की नियुक्ति पर भी विचार किया जाएगा.


खर्च कम करने की नई योजनाएँ

कंपनी अब लागत में कटौती के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। फ्लाइट टिकट में शामिल मुफ्त मील को वैकल्पिक बनाया जा सकता है। इसके साथ ही, बिजनेस क्लास में लाउंज एक्सेस को भी अलग से चार्ज किया जा सकता है। हालांकि, ये सभी प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में हैं और अंतिम निर्णय बोर्ड मीटिंग में लिया जाएगा.


पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने एयरलाइन की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। एयरस्पेस बंद होने के कारण फ्लाइट्स को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और संचालन लागत में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर कंपनी के लाभ पर पड़ा है.


नए CEO की खोज

वर्तमान CEO कैम्पबेल विल्सन इस वर्ष के अंत तक पद छोड़ सकते हैं। ऐसे में कंपनी नए CEO की तलाश में है। बताया जा रहा है कि कंपनी आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के उम्मीदवारों पर विचार कर रही है. उल्लेखनीय है कि सिंगापुर एयरलाइंस की एयर इंडिया में 25.1% हिस्सेदारी है, इसलिए नए CEO के चयन में उसकी भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है.


फ्लाइट शेड्यूल और किराए पर प्रभाव

कंपनी ने संकेत दिए हैं कि जून और जुलाई में अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स की संख्या में कमी की जा सकती है। बढ़ती लागत के कारण किराए में वृद्धि और ईंधन सरचार्ज भी लगाया गया है, लेकिन इससे यात्रियों की मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है.


एविएशन सेक्टर पर दबाव

यह संकट केवल एयर इंडिया तक सीमित नहीं है। हाल ही में इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी कई एयरलाइंस ने सरकार से सहायता की मांग की है। जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति की चिंता ने पूरे सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है.