×

8वें वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में भारी बढ़ोतरी की संभावना

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की नजरें 8वें वेतन आयोग पर हैं, जिसमें सैलरी में संभावित वृद्धि की चर्चा हो रही है। यदि कर्मचारी संगठनों की मांगें मान ली जाती हैं, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इस लेख में जानें कि कैसे फिटमेंट फैक्टर में बदलाव से विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की सैलरी में भारी इजाफा हो सकता है, और इसका रिटायर्ड कर्मचारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों की उम्मीदें

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की नजरें अब 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। यदि कर्मचारी संगठनों की हालिया मांगें मान ली जाती हैं, तो सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले चपरासी से लेकर उच्च पदों पर बैठे IAS अधिकारियों तक की सैलरी में एक महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिल सकती है। वर्तमान में न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, जो नई व्यवस्था के तहत सीधे 69,000 रुपये के पार जा सकती है। आइए इस गणित को विस्तार से समझते हैं।


फिटमेंट फैक्टर का महत्व

हाल ही में 28 से 30 अप्रैल के बीच नई दिल्ली में नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ पक्ष की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में कर्मचारियों ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी। उनका तर्क है कि मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई और महानगरों में रहने के खर्चों को देखते हुए वर्तमान वेतन ढांचा अपर्याप्त हो गया है। इसलिए, वेतन संरचना में सुधार की आवश्यकता है।


इस बदलाव का केंद्र 'फिटमेंट फैक्टर' है। सरल शब्दों में, यह वह फॉर्मूला है जिसके आधार पर किसी भी सरकारी कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी निर्धारित की जाती है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 निर्धारित किया गया था। अब कर्मचारी संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 3.83 किया जाए। यदि सरकार इस पर सहमत होती है, तो 18,000 रुपये की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 68,940 रुपये हो जाएगी। यह न केवल सेवारत कर्मचारियों के लिए, बल्कि रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में भी वृद्धि करेगा।


सैलरी में संभावित वृद्धि

यदि 3.83 के फॉर्मूले पर सहमति बनती है, तो पे-लेवल के अनुसार सैलरी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। लेवल 1 में चपरासी और अटेंडेंट जैसे पदों की मौजूदा बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर 69,000 रुपये के आसपास पहुंच जाएगी। इसी तरह, लोअर डिवीजन क्लर्क (लेवल 2) की सैलरी 19,900 रुपये से बढ़कर लगभग 76,000 रुपये हो जाएगी।


कांस्टेबल और कुशल कर्मचारियों (लेवल 3) की बेसिक पे 21,700 रुपये से बढ़कर 83,000 रुपये और जूनियर क्लर्क या ग्रेड डी स्टेनोग्राफर (लेवल 4) की 25,500 रुपये से बढ़कर करीब 97,000 रुपये हो सकती है। मिड-लेवल कर्मचारियों के लिए भी यह किसी जैकपॉट से कम नहीं है। लेवल-6 की सैलरी 35,400 रुपये से 1.35 लाख रुपये तक जा सकती है, वहीं लेवल-7 के अधिकारियों की बेसिक पे 44,900 रुपये से बढ़कर 1.72 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।


सीनियर अधिकारियों की सैलरी में वृद्धि

यह सैलरी वृद्धि केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। सीनियर अधिकारियों और उच्च ब्यूरोक्रेसी (जैसे IAS अधिकारी) की सैलरी भी एक नए स्तर पर पहुंचेगी। उदाहरण के लिए, लेवल-13 के अधिकारियों की सैलरी 1.23 लाख रुपये से बढ़कर 4.71 लाख रुपये और सबसे शीर्ष पद यानी लेवल-18 की सैलरी 2.50 लाख रुपये से बढ़कर सीधे 9.57 लाख रुपये के करीब पहुंच सकती है।