8वें वेतन आयोग के तहत पेंशनर्स की नई मांगें: उम्र के अनुसार बढ़ेगी पेंशन
पेंशनर्स की उम्मीदें: 8वें वेतन आयोग की चर्चा
जैसे-जैसे 8वें वेतन आयोग के गठन पर चर्चा तेज हो रही है, लाखों पेंशनर्स के चेहरे पर उम्मीद की नई किरण नजर आने लगी है। पेंशनर्स एसोसिएशन ने कर्मचारी यूनियनों के साथ मिलकर सरकार के सामने अपनी मांगें जोरदार तरीके से उठानी शुरू कर दी हैं। वर्तमान सरकारी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी, भत्तों और फिटमेंट फैक्टर में बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि रिटायर्ड कर्मचारी भी अपने बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
‘एज-लिंक्ड’ पेंशन फॉर्मूला: क्या है?
पेंशनर्स संगठनों की एक प्रमुख मांग है ‘एज-लिंक्ड पेंशन सिस्टम’, जिसके तहत रिटायर्ड कर्मचारियों की उम्र के साथ उनकी पेंशन बढ़ेगी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य बुजुर्गों को महंगे इलाज और रोजमर्रा के खर्चों के लिए किसी पर निर्भर न रहने देना है, ताकि उनका बुढ़ापा सुरक्षित रहे।
पेंशन की नई संरचना: उम्र के अनुसार लाभ
पेंशनर्स ग्रुप्स ने सरकार के सामने एक नया पेंशन स्ट्रक्चर पेश किया है, जिसमें बुजुर्गों की उम्र के अनुसार उनकी आखिरी सैलरी का प्रतिशत बढ़ाने की बात की गई है।
- 65 साल की उम्र पर आखिरी सैलरी का 70% पेंशन के रूप में मिलना चाहिए।
- 70 साल की उम्र पर यह बढ़कर 75% हो जाना चाहिए।
- 75 साल की उम्र में 80% पेंशन मिलनी चाहिए।
- 80 साल की उम्र पर यह 85% हो जानी चाहिए।
- 85 साल की उम्र में पेंशन को 90% कर दिया जाए।
- 90 साल या उससे अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए 100% पेंशन की मांग की गई है।
संगठनों का कहना है कि उम्र बढ़ने पर बुजुर्गों के मेडिकल और व्यक्तिगत देखभाल पर खर्च बढ़ जाता है, इसलिए यह पेंशन सपोर्ट आवश्यक है।
पेंशनर्स के लिए अन्य सुधारों की मांग
उम्र के अनुसार पेंशन बढ़ाने के अलावा, पेंशनर्स ने कई अन्य सुधारों की भी मांग की है। इनमें न्यूनतम पेंशन को आखिरी सैलरी का 67% करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही, मौजूदा फिटमेंट फैक्टर की समीक्षा करने की भी आवश्यकता बताई गई है। महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) के सिस्टम की पुनरावृत्ति और फैमिली पेंशन के नियमों को मजबूत करने की भी मांग की जा रही है।
1 करोड़ से अधिक लोगों की किस्मत का फैसला
यदि सरकार 8वें वेतन आयोग में पेंशनर्स की मांगों को स्वीकार करती है, तो यह देश के एक बड़े वर्ग की किस्मत बदल सकता है। इस फैसले का असर लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 56 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा, जिसमें रेलवे और रक्षा क्षेत्र के रिटायर्ड कर्मचारी भी शामिल हैं।