82 वर्षीय कलावती देवी को 47 साल बाद मिली पारिवारिक पेंशन, हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
उत्तर प्रदेश में सरकारी लापरवाही का मामला
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में सरकारी विभागों की लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है। 82 वर्षीय कलावती देवी को 47 साल के लंबे इंतजार के बाद पहली बार पारिवारिक पेंशन मिलने जा रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कलावती देवी की पहली पेंशन जारी करने की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही पिछले 47 वर्षों के बकाया एरियर और ग्रेच्युटी का भी भुगतान किया जाएगा।
टीटी यादव, जो जौनपुर जिले के सल्तनत बहादुर इंटर कालेज में सहायक अध्यापक थे, ने 15 अक्टूबर 1971 को अपनी सेवा शुरू की थी। उनका निधन 26 नवंबर, 1979 को हुआ। उस समय उनकी पत्नी कलावती देवी को 217 रुपये प्रतिमाह की पारिवारिक पेंशन मिलनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
कलावती देवी ने कई बार पेंशन शुरू करने के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें कोई मदद नहीं मिली। ग्रामीण पृष्ठभूमि और शिक्षित न होने के कारण वह पेंशन के लिए ज्यादा प्रयास नहीं कर सकीं। 2024 में उनके दामाद ने डीआइओएस कार्यालय जाकर पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन वहां साढ़े चार दशक पुराने अभिलेखों की अनुपलब्धता का हवाला देकर पेंशन देने से मना कर दिया गया।
इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को तुरंत पेंशन जारी करने का आदेश दिया।
संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह ने बताया कि 20 मई को पहली पेंशन जारी करने की फाइल को मंजूरी मिल गई है। एक या दो महीने में उन्हें भारतीय स्टेट बैंक की बदलापुर शाखा से आज के वेतनमान के अनुसार पेंशन मिलने लगेगी।
कलावती देवी, जो 1 जनवरी 1944 को जन्मी थीं, की एक बेटी लालती देवी हैं। लालती देवी के बेटे अनिल यादव ने बताया कि उनकी नानी कई बीमारियों से जूझ रही हैं। नाना के निधन के बाद रिश्तेदारों ने भी उनका साथ छोड़ दिया। अब अनिल अपनी नानी का इलाज करवा रहे हैं। यह पेंशन उनके लिए एक सहारा बनेगी।
इस बीच, समाजवादी पार्टी के अमेठी विधायक महराजी प्रजापति के आवास पर सपा कार्यकर्ताओं द्वारा गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला भी चर्चा में है। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इस घटना पर अखिलेश यादव पर आरोप लगाए हैं।