2026 में भारत की राजनीति: महत्वपूर्ण चुनाव और विधायी प्रस्ताव
राजनीतिक घटनाक्रमों का नया साल
नया वर्ष भारत की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह बनेगा, जो शासन की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। राज्यों में होने वाले चुनावों से लेकर विवादास्पद विधायी प्रस्तावों और प्रमुख दलों में नेतृत्व परिवर्तन तक, 2026 सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों के लिए एक निर्णायक वर्ष हो सकता है। 2025 की तुलना में, 2026 में राजनीतिक गतिविधियाँ अधिक होंगी, क्योंकि इस वर्ष पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होंगे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ अपनी सरकार की रक्षा करेंगी, जबकि कांग्रेस और वामपंथी दल अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास करेंगे। यहां भाजपा ममता को सत्ता से हटाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की जमीनी पकड़ मजबूत बनी हुई है। टीएमसी को लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है, जबकि वामपंथी दलों और कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी करना चुनौतीपूर्ण होगा। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई, 2026 को समाप्त हो रहा है।
तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य
तमिलनाडु में डीएमके को एआईएडीएमके से चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जिसे भाजपा का समर्थन प्राप्त है। एआईएडीएमके ने 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए के साथ नहीं लड़ा, लेकिन उसे लगभग 20.5 प्रतिशत वोट मिले। यदि डीएमडीके के वोटों को जोड़ दिया जाए, तो एनडीए का कुल वोट शेयर लगभग 41 प्रतिशत हो जाता है।
केरल में राजनीतिक बदलाव
केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाला एलडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश करेगा। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ की वापसी और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की जीत ने केरल की द्विध्रुवीय राजनीति को नया मोड़ दिया है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है।
असम में चुनावी मुकाबला
असम में भाजपा के हिमंता बिस्वा सरमा का सामना कांग्रेस के पुनरुत्थान से होगा। वहीं, पुडुचेरी में एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन को डीएमके और कांग्रेस के खिलाफ अपने गठबंधन को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। असम विधानसभा के चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होने की संभावना है।
बीएमसी चुनाव का महत्व
विपक्ष के लिए आगामी चुनावी दौर महत्वपूर्ण है, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव 15 जनवरी को होंगे। भारत के सबसे धनी नगर निकाय पर नियंत्रण न केवल प्रशासनिक शक्ति रखता है, बल्कि इसका प्रतीकात्मक महत्व भी है।
विधायी प्रस्तावों पर बहस
2026 में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने के प्रस्ताव पर बहस हो सकती है, जिसे 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' कहा जाता है। भाजपा के कई दीर्घकालिक वैचारिक लक्ष्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं, और अब एक साथ चुनाव कराना पार्टी की नई राजनीतिक परियोजनाओं का हिस्सा बन रहा है।
नक्सलवाद का अंत?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश में नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में माओवादी विरोधी अभियान तेज हुए हैं। नक्सलियों के खिलाफ केंद्र की रणनीति पर राजनीतिक बहस होने की संभावना है।
जनगणना और परिसीमन
भारत की दशकीय जनगणना 16 वर्षों के बाद 2026 में शुरू होगी। यह पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी और इसमें जाति गणना भी शामिल होगी। प्रारंभिक चरण में घरों की सूची अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगी, जिसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी।