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2026 में भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर ज्योतिषीय भविष्यवाणी

ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी ने 2026 के लिए कई महत्वपूर्ण भविष्यवाणियाँ की हैं। उन्होंने बताया कि यह वर्ष आर्थिक मंदी का संकेत दे सकता है, जबकि भारत की कूटनीति और विदेश नीति में मजबूती आएगी। इसके साथ ही, नए वायरस के जन्म और प्राकृतिक आपदाओं की आशंका भी जताई गई है। जानें इस वर्ष की अन्य ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ और उनका प्रभाव।
 

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से 2026 का विश्लेषण

ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी के अनुसार, 2026 का वर्ष 2025 की तुलना में बेहतर होगा, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित होंगी जो व्यापक प्रभाव डालेंगी। आर्थिक दृष्टि से, यह वर्ष मंदी का संकेत देता है, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अन्य क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।


पंडित द्विवेदी ने बताया कि भारत के आकाश में कन्या लग्न के उदय के साथ रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के उच्च चंद्रमा का संचार हो रहा है। नव वर्ष 2026 का आगमन श्री गणेश सिद्धि योग में हो रहा है, जो आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।


ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव

नव वर्ष 2026 की कुंडली कन्या लग्न और वृषभ राशि की है। इस वर्ष की कुंडली के अनुसार, लग्नेश बुध सुख भाव में बृहस्पति के घर में सूर्य, मंगल और शुक्र के साथ है। यह स्थिति भारत के लिए उन्नति का संकेत देती है।


भारत की कूटनीति और विदेश नीति मजबूत होगी, जिससे विश्व व्यापार में आयात-निर्यात में वृद्धि होगी। भारत वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उभरेगा।


संभावित चुनौतियाँ और स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन

हालांकि, पंडित द्विवेदी ने चेतावनी दी है कि शनि और राहु की युति नए वायरस या महामारी का जन्म दे सकती है। यह वर्ष चिकित्सा क्षेत्र में नई खोजों और उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण होगा।


भारत की कुंडली में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र की युति से बड़े युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की आशंका जताई गई है।


आर्थिक स्थिति और फसल की भविष्यवाणी

रबी और खरीफ की फसलें सामान्य रहेंगी, लेकिन सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि देखने को मिलेगी। डीजल और पेट्रोल की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।


नव वर्ष की कुंडली में सुख भाव में ग्रहों की स्थिति से आर्थिक मंदी की आशंका बनी हुई है।


ग्रहण और हिंदी मास की वृद्धि

2026 में चार ग्रहण होंगे, जिनमें से भारत में केवल एक ग्रहण 3 मार्च को दिखाई देगा। इसके अलावा, हिंदी मास में ज्येष्ठ मास की वृद्धि से इस वर्ष 13 महीने मान्य होंगे।


इस वर्ष मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त सामान्य से कम होंगे, और कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि का प्रभाव रहेगा।