2026 में भारत और विश्व के लिए ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ
ज्योतिष का महत्व
आज के समय में ज्योतिष शास्त्र की प्रासंगिकता अत्यधिक है। इसके माध्यम से हम वैश्विक घटनाओं का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम में प्रसिद्ध ज्योतिषी रोहिताश्व त्रिवेदी ने भाग लिया, जिसमें हमने उनसे 2026 के बारे में जानकारी प्राप्त की।
2026 का वैश्विक परिदृश्य
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, नया साल मार्च के बाद शुरू होगा। 2026 में देश और दुनिया में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित होंगी।
भारत के लिए 2026
जनवरी और फरवरी में भारत में कुछ असमंजस की स्थिति उत्पन्न होगी, लेकिन यह समय अशुभ नहीं होगा। मार्च के बाद स्थिति में तीव्रता आएगी। रोहिताश्व त्रिवेदी ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार नए साल में 'ऑपरेशन सिंदूर' और भी अधिक प्रभावी होगा। भारतीय उपमहाद्वीप में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए साल में अपने संन्यास के बारे में विचार कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उनकी लोकप्रियता में गिरावट संभव है, और एनडीए तथा भाजपा की एकता को लेकर भी चिंताएँ बढ़ सकती हैं।
एनडीए की स्थिति
एनडीए की एकजुटता में कमी आएगी, और भाजपा में भी कोई विशेष एकता नहीं दिखाई देगी।
राहुल और प्रियंका का भविष्य
राहुल गांधी की लोकप्रियता में कमी आएगी, जबकि प्रियंका गांधी की राजनीतिक यात्रा में तेजी आएगी। कांग्रेस की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
विपक्षी गठबंधन
ममता बनर्जी और मायावती की राजनीतिक सक्रियता बढ़ेगी, और ये दोनों विपक्ष के प्रमुख चेहरे बनकर उभरेंगे।
राज्यों में कानून व्यवस्था
राज्यों में कानून व्यवस्था को लेकर सतर्क रहना होगा। सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की संभावना है, और मार्च से यह स्थिति और बिगड़ सकती है।
प्राकृतिक आपदाएँ
2025 में प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप देखने को मिला, और 2026 में भी इसके जारी रहने की आशंका है। उत्तर और मध्य भारत में इसका प्रभाव अधिक होगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था
भारत की विदेश नीति और अर्थव्यवस्था असमंजस में रहेगी। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था में धीमापन आएगा, लेकिन इसके बाद आर्थिक प्रगति की गति फिर से तेज हो सकती है।
महंगाई और रोजगार
2026 में रोजगार और महंगाई में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। गरीबी बढ़ने की संभावना है।
आतंकवाद की चुनौती
2026 में आतंकवाद एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। भारत और अमेरिका जैसे देश आतंकवाद के खिलाफ और अधिक मुखर होंगे।
भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध
पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण संबंध बने रहेंगे। लद्दाख में तनाव की स्थिति फिर से उत्पन्न हो सकती है।