2025 में इनकम टैक्स नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव: जानें क्या है नया
इनकम टैक्स नियमों में बदलाव
इनकम टैक्स रूल्स में बदलाव.
वर्ष 2025 ने इनकम टैक्स दाताओं के लिए कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए हैं. इस वर्ष न केवल टैक्स से संबंधित नियमों में बदलाव हुआ, बल्कि रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का प्रयास किया गया जिसका उद्देश्य टैक्स प्रणाली को अधिक सहज बनाना, गलतियों की संख्या को कम करना और ईमानदार टैक्स दाताओं को राहत प्रदान करना है. इन परिवर्तनों का प्रभाव भविष्य में आपकी टैक्स योजना पर भी पड़ेगा.
टैक्स फ्री आय सीमा में वृद्धि
बजट 2025 में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव टैक्स फ्री आय सीमा को लेकर किया गया है. नए टैक्स ढांचे के तहत टैक्स छूट बढ़ाने से अब उच्च आय वाले वेतनभोगियों को भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा. स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलने के बाद एक निश्चित सीमा तक की आय पूरी तरह से टैक्स फ्री हो गई है, जिससे मध्यवर्ग और नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ हुआ है.
ITR फाइलिंग प्रक्रिया में सुधार
2025 में इनकम टैक्स रिटर्न से संबंधित समयसीमा और प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं, जिसमें कई बार डेडलाइन को बढ़ाया गया है, ताकि टैक्स दाताओं को सही तरीके से रिटर्न फाइल करने का अवसर मिल सके. इसके साथ ही कुछ टैक्स आदेशों के लिए ऑनलाइन सुधार की सुविधा भी प्रदान की गई है, जिससे दफ्तर के चक्कर कम हुए हैं और कार्य में तेजी आई है.
TDS और TCS नियमों में सरलता
छोटे टैक्स दाताओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2025 में राहत के कई उपाय किए गए हैं. बैंक ब्याज, किराए और कुछ भुगतान पर TDS की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे बार-बार टैक्स कटने की समस्या कम हुई है और रिफंड की प्रक्रिया भी सरल हुई है. विशेष रूप से बुजुर्गों और छोटे व्यवसायियों को इससे बड़ा लाभ हुआ है.
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पार्टनर्स को भुगतान पर नया TDS नियम
2025 से फर्म और LLP में पार्टनर्स को मिलने वाली सैलरी, बोनस, कमीशन या ब्याज पर नया TDS नियम लागू किया गया है. इसका उद्देश्य टैक्स पारदर्शिता को बढ़ाना है. हालांकि इससे अनुपालन में वृद्धि हुई है, लेकिन दीर्घकालिक में यह टैक्स प्रणाली को अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय बनाएगा.
अपडेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए अधिक समय
अब टैक्स दाताओं को अपनी गलतियों को सुधारने के लिए अधिक समय दिया जाएगा. अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है, जिससे लोग पिछले वर्षों की आय को सही तरीके से घोषित कर सकें. इससे टैक्स विवादों की संख्या कम होगी और लोग बिना डर के अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर प्राप्त करेंगे.