×

सांस लेने में कठिनाई: कारण और आयुर्वेदिक उपचार

सर्दियों में सांस लेने में कठिनाई एक सामान्य समस्या है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों का संकेत हो सकती है। यह लेख आपको इसके कारणों और आयुर्वेदिक उपचारों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। जानें कि कैसे सही खान-पान और प्राणायाम से आप अपनी सांसों को बेहतर बना सकते हैं।
 

सांस लेने में कठिनाई के सामान्य कारण


सांस लेने में कठिनाई तब सामान्य होती है जब आप भारी काम कर रहे होते हैं, तेज चल रहे होते हैं या लंबे समय तक दौड़ रहे होते हैं। लेकिन यदि आप थोड़ी सी पैदल चलने पर भी सांस फूलने लगते हैं, तो सतर्क रहना आवश्यक है। आजकल की जीवनशैली में लिफ्ट ने सीढ़ियों की जगह ले ली है और जिम ने पार्कों की। चलने की आवश्यकता कम होती जा रही है। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सांस लेने में कठिनाई केवल कमजोरी का लक्षण नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है।


सर्दियों में सांस लेने में कठिनाई

सर्दियों में सांस लेने में कठिनाई सबसे आम होती है। इस मौसम में हृदय, फेफड़ों या रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ठंडी हवा फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देती है, जिससे गले में सूखापन, सांस फूलना और चलने पर थकान महसूस होती है। यह कमजोर हृदय, कमजोर फेफड़े और थायरॉयड असंतुलन का संकेत हो सकता है। कभी-कभी ये लक्षण एनीमिया की ओर भी इशारा करते हैं।


आयुर्वेदिक उपचार

यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो आयुर्वेद में इसके लिए उपाय उपलब्ध हैं। सर्दियों में तुलसी और लौंग का काढ़ा पीने से राहत मिलती है। सुबह तुलसी, अदरक और लौंग का काढ़ा पीने से फेफड़ों का संकुचन कम होता है और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे फेफड़े सही तरीके से कार्य करते हैं।

इसके अलावा, overnight भिगोए गए मेथी के बीजों का सुबह गुड़ के साथ सेवन करना भी फायदेमंद है। यह मिश्रण फेफड़ों को मजबूत करता है और ठंडी हवा से उन्हें कम नुकसान पहुंचाता है।


खाने की आदतें

भारी, तले हुए और मसालेदार भोजन भी डायाफ्राम और फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। तले हुए खाद्य पदार्थ पेट और डायाफ्राम को प्रभावित करते हैं, जिससे डायाफ्राम फेफड़ों को संकुचित करता है। इसलिए, शुद्ध और पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। शहद और अदरक का रस पीना भी सहायक हो सकता है। इससे कफ कम होता है और सांस लेने में कठिनाई में राहत मिलती है।


प्राणायाम का महत्व

फेफड़ों को मजबूत करने और हार्मोन को संतुलित करने के लिए नियमित रूप से प्राणायाम का अभ्यास करना भी आवश्यक है। हर सुबह अनुलोम विलोम, भ्रामरी और गहरी सांस लेने के व्यायाम करें। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, श्वसन मार्ग को शांत करता है और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करता है। इसके अलावा, दिनभर गर्म पानी पीने का प्रयास करें। इससे फेफड़ों में संक्रमण कम होता है।


सामाजिक मीडिया

PC Social Media