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सुप्रीम कोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज की गैस विवाद पर सुनवाई शुरू

सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सहयोगी कंपनियों की गैस विवाद पर सुनवाई शुरू की है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के मध्यस्थता फैसले को चुनौती दी गई है। सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में हो रही है, जिसमें गैस चोरी के आरोपों को तकनीकी और कानूनी दृष्टि से गलत बताया गया है। 2018 में केंद्र के 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगा।
 

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की शुरुआत

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों द्वारा दायर अपीलों की अंतिम सुनवाई आरंभ की। इन अपीलों में कृष्णागोदावरी बेसिन गैस विवाद से संबंधित दिल्ली हाई कोर्ट के मध्यस्थता फैसले को चुनौती दी गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी एक्सप्लोरेशन लिमिटेड और निको लिमिटेड ने 14 फरवरी, 2025 को दिए गए हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। इससे पहले, हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 2023 में इन कंपनियों के पक्ष में मध्यस्थता के फैसले को बरकरार रखा था।


चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुनवाई

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने केंद्र के उस आरोप को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी के ब्लॉकों से गैस 'निकाली' थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस का प्रवाह दबाव के अंतर के कारण स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे जैविक प्रक्रिया 'ऑस्मोसिस' से तुलना की जा सकती है।


गैस चोरी का आरोप तकनीकी और कानूनी रूप से गलत

सिंघवी ने कहा कि गैस चोरी का आरोप तकनीकी और कानूनी दृष्टि से गलत है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश या अन्वेषण जोखिम नहीं उठाया, लेकिन गैस से मिलने वाले रॉयल्टी और लाभ की अंतिम प्राप्तकर्ता वही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस गहरे समुद्र के प्रोजेक्ट में 7.4 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो घरेलू गैस उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।


2018 में केंद्र का दावा खारिज

पहले, 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने केंद्र के 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज करते हुए संबंधित कंपनियों को 83 लाख डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र की अपील को स्वीकार करते हुए इस फैसले को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर बुधवार को आगे की सुनवाई करेगा।