श्वेत कुष्ठ के उपचार के लिए सप्त तेल का प्रयोग
इस लेख में, हम श्वेत कुष्ठ के उपचार के लिए दादा मदन लाल जी द्वारा प्रदत्त सप्त तेल के प्रयोग के बारे में जानेंगे। यह प्रयोग निराश रोगियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। जानें कि किस प्रकार से इन सात तेलों का मिश्रण तैयार किया जाता है और इसे कैसे उपयोग में लाया जाता है। इस प्रक्रिया में धैर्य की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लाभ निश्चित रूप से देखने को मिलते हैं।
May 29, 2026, 16:30 IST
सप्त तेल का उपयोग और तैयारी
- तीस से चालीस वर्षों से अधिक समय तक किए गए इस प्रयोग का उद्देश्य निराश रोगियों की सहायता करना है। यदि श्वेत कुष्ठ पुराना हो गया है, तो यह प्रयोग उपयोगी हो सकता है।
आवश्यक सामग्री :
- बावची तेल 10 मिली
- चाल मोगरा तेल 10 मिली
- लौंग तेल 10 मिली
- दालचीनी तेल 10 मिली
- तारपीन तेल 10 मिली
- श्वेत मिर्च का तेल 20 मिली
- नीम तेल 40 मिली
सप्त तेल तैयार करने की विधि और लगाने का तरीका :
- इन सभी तेलों को मिलाकर सुबह और शाम अच्छी तरह से मालिश करें। चाहे श्वेत कुष्ठ कितना भी पुराना क्यों न हो, इस तेल के प्रयोग से ठीक हो सकता है। ध्यान रखें कि इसमें चार से सात महीने का समय लग सकता है, इसलिए निराश नहीं होना चाहिए। यदि कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो इसमें 50 मिली नारियल तेल मिलाया जा सकता है, जिससे इसकी शक्ति कम हो जाएगी। इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करें ताकि अन्य रोगी भी इसका लाभ उठा सकें।
- स्रोत : स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार लेख दादा मदन लाल जी का गुरु प्रदत्त अनुभूत प्रयोग। यह प्रयोग कुशल वैद्य या आयुर्वेदाचार्य की देखरेख में करना चाहिए।