रूस पर नए प्रतिबंधों का प्रस्ताव: भारत की कंपनियों पर भी असर
यूरोपीय संघ का नया प्रतिबंध पैकेज
नई दिल्ली: यूरोपीय संघ (EU) ने रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज के तहत 50 कंपनियों पर नए निर्यात नियंत्रण प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है। एक यूरोपीय राजनयिक ने बुधवार को बताया कि इनमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं।
प्रतिबंधों का उद्देश्य
यह कदम यूरोपीय संघ के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को सहायता देने वाले नेटवर्क पर नियंत्रण पाना है। हालांकि, इस नए प्रतिबंध पैकेज को लागू करने के लिए सभी सदस्य देशों की मंजूरी आवश्यक होगी।
प्रभावित देश
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा क्लास के अनुसार, इस नए पैकेज में कई देशों की कंपनियों पर निर्यात-नियंत्रण उपाय शामिल हैं। प्रभावित देशों में शामिल हैं: भारत, चीन, तुर्किये, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, और संयुक्त अरब अमीरात। इसके अलावा, रूस के ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़े 30 से अधिक नए प्रतिबंधात्मक नाम भी शामिल किए जाएंगे।
रूसी तेल और LNG पर नए कदम
रूसी तेल के अवैध व्यापार और LNG की बिक्री को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रतिबंधित 632 जहाजों के अलावा, 30 नए जहाजों को भी प्रतिबंध सूची में जोड़ा जाएगा। पहली बार, उन जहाजों को भी निशाना बनाया जाएगा जो रूस के गुप्त बेड़े को ईंधन भरने जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं।
भारत पर संभावित प्रभाव
भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से पूरा कर रहा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद, भारत और चीन ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बढ़ा दिया था। ईयू के नए प्रतिबंधों से भारत में आने वाले रूसी तेल के टैंकरों की संख्या में कमी आ सकती है, जिससे देश में तेल संकट उत्पन्न हो सकता है।
प्रतिबंधों में अन्य उपाय
इस प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज में रूसी तेल मूल्य सीमा को अस्थायी रूप से फ्रीज करने और उन संस्थानों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है, जो मॉस्को को राजस्व उत्पन्न करने में मदद कर रहे हैं।
निष्कर्ष
इन उपायों के माध्यम से उन बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को निशाना बनाया जाएगा, जो कथित तौर पर रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का उल्लंघन करने में मदद कर रहे हैं।