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यूरोप में भीषण गर्मी: ओमेगा ब्लॉक का प्रभाव

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसमें तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे देशों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका मुख्य कारण ओमेगा ब्लॉक है, जो एक उच्च दबाव प्रणाली है। इस प्रणाली के कारण सहारा रेगिस्तान से गर्म हवाएं यूरोप में पहुंच रही हैं। जानें इस गर्मी के प्रभाव और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे में।
 

यूरोप में गर्मी की स्थिति


अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | अपडेट: 26 जून 2026 यूरोप इस समय पिछले कई दशकों की सबसे गंभीर गर्मी का सामना कर रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी, पुर्तगाल सहित लगभग 26 यूरोपीय देशों में भयंकर हीटवेव का असर है। कई स्थानों पर तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा चुका है। फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी कस्बे पिसोस (Pissos) में 44.3°C तापमान रिकॉर्ड किया गया, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।


रेड अलर्ट और स्वास्थ्य संकट

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि फ्रांस में रेड अलर्ट जारी किया गया है। हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं, न्यूक्लियर पावर प्लांट का संचालन रोकना पड़ा है, और स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घरों में रहने की सलाह दे रही हैं।


गर्मी का कारण: ओमेगा ब्लॉक

यूरोप में अचानक आई इस भीषण गर्मी का कारण एक दुर्लभ मौसमीय प्रणाली है जिसे वैज्ञानिक “ओमेगा ब्लॉक” कहते हैं।


ओमेगा ब्लॉक क्या है?


ओमेगा ब्लॉक एक उच्च दबाव प्रणाली है, जिसका आकार ग्रीक अक्षर Ω (ओमेगा) जैसा होता है। यह प्रणाली कई दिनों या हफ्तों तक एक ही स्थान पर स्थिर रह सकती है।


जब ऐसा होता है, तो मौसम में बदलाव रुक जाता है। बादल नहीं बनते, बारिश नहीं होती, और ठंडी हवाएं उस क्षेत्र में नहीं पहुंच पातीं।


हाई प्रेशर नीचे की ओर दबाव बनाता है, जिससे हवा और गर्म होती जाती है। वैज्ञानिक इसे Heat Dome Effect भी कहते हैं, क्योंकि यह गर्म हवा को ढक्कन की तरह कैद कर देता है।


सहारा रेगिस्तान की गर्म हवा का प्रभाव

इस बार ओमेगा ब्लॉक के साथ उत्तर अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं सीधे स्पेन, फ्रांस और इटली तक पहुंच गईं।


भूमध्य सागर पार करते हुए यह हवा पहले से गर्म यूरोपीय महाद्वीप में फंस गई और तापमान तेजी से बढ़ गया।


इसलिए, फ्रांस, स्पेन और इटली में कई स्थानों पर तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।


फ्रांस में गंभीर स्थिति

फ्रांस इस समय सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है।



  • पिसोस में 44.3°C तापमान दर्ज किया गया।

  • 1947 के बाद सबसे गर्म रात रिकॉर्ड की गई।

  • 13,500 से अधिक स्कूल बंद या समय बदला गया।

  • गारोन नदी का पानी गर्म होने पर गोलफेक न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद करना पड़ा।

  • सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर अस्थायी रोक।

  • नदियों और झीलों में राहत तलाशने गए कई लोगों की डूबने से मौत।


सरकार ने नागरिकों से दोपहर में बाहर नहीं निकलने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।


स्पेन, इटली और ब्रिटेन में भी संकट

स्पेन के कई हिस्सों में तापमान 44°C तक पहुंचने का अनुमान है।


इटली के रोम, मिलान, फ्लोरेंस सहित 16 प्रमुख शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।


ब्रिटेन में जून का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां तापमान 36.4°C तक पहुंच गया। ब्रिटिश मौसम विभाग ने इतिहास में दूसरी बार अत्यधिक गर्मी की चेतावनी जारी की है।


भारत और यूरोप की गर्मी में अंतर

भारत में गर्मी हर साल अप्रैल और मई के दौरान प्री-मानसून सीजन में पड़ती है।