माला सिन्हा: विवादों में घिरी एक अदाकारा की कहानी
हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा
50 और 60 के दशक में हिंदी फिल्म उद्योग में एक ऐसी अभिनेत्री का नाम लिया जाता है, जो लगभग हर निर्माता की पहली पसंद बन गई थी। माला सिन्हा ने अपने करियर में राजेश खन्ना, धर्मेंद्र और मनोज कुमार जैसे दिग्गजों के साथ काम किया और अपनी अदाकारी से सबका दिल जीत लिया। उनकी खूबसूरती और अदाओं ने उन्हें दर्शकों का प्रिय बना दिया। माला सिन्हा ने 'परवरिश', 'बादशाह', 'नया जमाना', और 'धूल का फूल' जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया। इनमें से एक गाना 'आपकी नजरों ने समझा, प्यार के काबिल मुझे' आज भी लोगों की जुबान पर है। हालांकि, समय के साथ माला सिन्हा को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
एक विवाद ने सब कुछ बदल दिया
1992 में माला सिन्हा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। लेकिन जब उनकी जिंदगी में एक विवाद ने दस्तक दी, तो सब कुछ बदल गया। 1964 में उनके घर पर आयकर विभाग ने छापा मारा, जिसमें बाथरूम की दीवारों से नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। यह रकम लगभग 12 लाख रुपये थी, जो उस समय काफी बड़ी मानी जाती थी। इस मामले ने कोर्ट का रुख किया और माला सिन्हा ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने ये पैसे जिस्मफरोशी से कमाए हैं, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी।
सच्चाई का खुलासा
इस विवाद के बाद माला सिन्हा ने बताया कि उन्होंने कानूनी सलाह के तहत यह बयान दिया था ताकि वह सजा से बच सकें। उनके वकीलों ने उन्हें सलाह दी थी कि ऐसा कहने से वह अवैध संपत्ति और टैक्स चोरी के आरोपों से बच सकती हैं। लेकिन यह बयान उनके लिए भारी पड़ गया और उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इसके बाद, फिल्म निर्माताओं ने उनसे दूरी बना ली और उन्हें काम मिलना बंद हो गया।
माला सिन्हा का असली नाम और व्यक्तिगत जीवन
माला सिन्हा का असली नाम माल्डा सिन्हा था। उनके सहपाठी उन्हें 'डालडा' कहकर चिढ़ाते थे, जिसके कारण उन्होंने अपना नाम बदलने का निर्णय लिया। माला ने नेपाली अभिनेता चिदंबर प्रसाद लोहानी से तीन बार शादी की, जिसमें कोर्ट मैरिज, ईसाई रीति-रिवाज और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज शामिल थे। उनकी बेटी प्रतिभा सिन्हा ने भी अभिनय में कदम रखा, लेकिन वह अपनी मां की तरह सफल नहीं हो सकीं और धीरे-धीरे इंडस्ट्री से दूर हो गईं।