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मलाना: भारत का रहस्यमयी गांव और इसके अनोखे कानून

मलाना, पार्वती घाटी में स्थित एक अनोखा गांव है, जिसे 'विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र' कहा जाता है। यहां के निवासियों के लिए बाहरी लोगों को छूना सख्त मना है, और इसके उल्लंघन पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। गांव में अपनी एक अनोखी न्याय प्रणाली है, जिसमें देवता के माध्यम से निर्णय लिए जाते हैं। जानें इस रहस्यमयी गांव की और भी विशेषताएं और परंपराएं।
 

मलाना का अनोखा गांव


पार्वती घाटी में 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित मलाना गांव को भारत का सबसे रहस्यमयी गांव माना जाता है। इसे 'विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र' भी कहा जाता है। हाल ही में यह गांव एक अनोखे कानून के कारण चर्चा में आया है।


यहां के निवासियों के लिए बाहरी लोगों को छूना सख्त मना है। यदि कोई गलती से भी उन्हें छू लेता है, तो उसे 5,000 रुपये का जुर्माना और गांव से हमेशा के लिए बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। मलाना के लोग खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं और उनकी अपनी एक अनोखी भाषा 'कनाशी' है, जो कहीं और नहीं बोली जाती। यहां न तो भारतीय संविधान लागू होता है और न ही हिमाचल पुलिस का कानून। ये लोग केवल जमघट्टा देवता के कानून का पालन करते हैं।


गांव का कानून और न्याय प्रणाली

मलाना में 11 सदस्यों की एक संसद होती है, जिसमें ऊपरी और निचली हुकुम शामिल हैं। किसी भी अपराध का निर्णय देवता के माध्यम से किया जाता है। न्याय का आधार दो तरीकों पर होता है: एक में जहर और दूसरे में सच। जिस रास्ते भेड़ जाए, वही निर्णय मान लिया जाता है।


गांव के लोग मानते हैं कि वे शुद्ध जाति के हैं और बाहरी लोग 'अछूत' हैं। यदि कोई बाहरी व्यक्ति उन्हें छू लेता है, तो उनकी जाति अपवित्र हो जाती है, इसलिए यह नियम बनाया गया है।


मलानवी से हाथ मिलाना, उनके घर को छूना और उनके रास्ते पर चलना मना है। यदि कोई दुकान से सामान लेता है, तो उसे खुद उठाना पड़ता है। यदि ये नियम टूटते हैं, तो जुर्माना लगाया जाता है। पहले जुर्माना 1,000 रुपये था, लेकिन अब यह 5,000 रुपये तक पहुंच गया है। गांव में रात 8 बजे के बाद बाहर निकलना मना है। चुनावों में महिलाएं वोट नहीं डाल सकतीं, लेकिन निर्णय लेने में उनकी भागीदारी होती है। यहां बिजली और पानी की सुविधा है, लेकिन इंटरनेट और मोबाइल सिग्नल की कोई उपलब्धता नहीं है।