मणिपुर में तनाव: पांगल छात्रों की शिक्षा पर संकट
मणिपुर में हिंसा के बाद का हाल
इम्फाल। मणिपुर के थोउबल जिले में खंगाबोक और संगइयुमफम गांवों के बीच 18 अक्टूबर को हुई हिंसा के बाद उत्पन्न तनाव अब भी जारी है, जो कि 16 दिन बीत जाने के बाद भी समाप्त नहीं हुआ है। इस स्थिति के कारण पांगल (मुस्लिम) समुदाय के लगभग 1,000 बच्चे मैतेई (हिंदू) बहुल क्षेत्रों में स्थित अपने स्कूलों में नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन वर्षों में जातीय हिंसा के कारण लगभग 350 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 60,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
हिंसा की शुरुआत और प्रशासन की कार्रवाई
18 अक्टूबर को एक संगीत कार्यक्रम के दौरान पत्थरबाजी के कारण विवाद उत्पन्न हुआ, जिसमें खंगाबोक गांव के निवासी राकेश लैशराम की गोली लगने से मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में आगजनी और तनाव फैल गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीणों से उनके लाइसेंसी हथियार वापस ले लिए हैं और सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) तथा रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की टुकड़ियों को तैनात किया है। दोनों गांवों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग संयुक्त कार्रवाई समितियां (जेएसी) बनाई हैं।
छात्रों की शिक्षा पर प्रभाव
संगइयुमफम जेएसी के संयोजक अतउर रहमान ने बताया कि क्षेत्र में डर का माहौल इतना गहरा है कि प्राथमिक से लेकर उच्च विद्यालय तक के लगभग 1,000 छात्र 18 अक्टूबर से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जिनमें से संगइयुमफम गांव के करीब 700 बच्चे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि, खंगाबोक के ग्रामीणों ने किसी बच्चे को आने से नहीं रोका है, लेकिन दोनों पक्षों के अपने-अपने क्षेत्रों में सीमित रहने के कारण बच्चे भयवश स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
शांति वार्ता में देरी
खंगाबोक जेएसी के सह-संयोजक थोकचोम किरण ने स्पष्ट किया कि उनके गांव ने पांगल बच्चों के स्कूल आने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने बताया कि शांति वार्ता में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि संगइयुमफम के ग्रामीणों ने हत्या की घटना के लिए न तो माफी मांगी है और न ही आरोपी को सामने लाए हैं। उन्होंने कहा कि उनका गांव मृतक के अंतिम संस्कारों और रीति-रिवाजों में व्यस्त है, जो 6 नवंबर को समाप्त होंगे।
प्रशासन की स्थिति
इस बीच, दोनों पक्षों की जेएसी ने मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और राज्य के गृह मंत्री से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री द्वारा 28 अक्टूबर को दोनों गांवों का दौरा किए जाने के बावजूद अब तक शांति बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह हिंसा दो समुदायों के बीच का सांप्रदायिक संघर्ष नहीं बल्कि एक स्थानीय विवाद था। थोउबल के पुलिस अधीक्षक एम. प्रभाकर ने बताया कि क्षेत्र में वर्तमान में कोई हिंसा नहीं हो रही है और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित माहौल में स्कूल वापस भेजना है।