×

भोपाल में ट्विशा शर्मा आत्महत्या केस: बेल्ट की लिगेचर रिपोर्ट आई सामने

भोपाल में ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में बेल्ट की लिगेचर रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें आत्महत्या का कारण स्पष्ट किया गया है। फॉरेंसिक जांच में बेल्ट और गले पर मिले निशानों के बीच समानता पाई गई है। हालांकि, प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान बेल्ट उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और लिगेचर मटेरियल के महत्व के बारे में।
 

ट्विशा शर्मा केस में लिगेचर रिपोर्ट का खुलासा

भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में अब उस बेल्ट की लिगेचर रिपोर्ट सामने आई है, जिसका उपयोग आत्महत्या के लिए किया गया था। फॉरेंसिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ट्विशा ने उसी बेल्ट से फांसी लगाई थी। रिपोर्ट में गले पर पाए गए लिगेचर मार्क्स और बेल्ट की संरचना का मिलान किया गया, जिसमें समानता पाई गई। जांच रिपोर्ट में मौत का कारण आत्महत्या बताया गया है। इस मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान फंदे में इस्तेमाल की गई बेल्ट डॉक्टरों को नहीं दी गई थी।



फॉरेंसिक प्रक्रिया में लिगेचर सामग्री का महत्व अत्यधिक होता है, क्योंकि इसी के आधार पर चिकित्सक यह निर्धारित करते हैं कि मौत फांसी से हुई है या शव को किसी अन्य परिस्थिति में लटकाया गया है। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आत्महत्या में प्रयुक्त बेल्ट को जांच एजेंसियों को सौंपा था। इसके बाद विस्तृत फॉरेंसिक जांच की गई, जिससे यह रिपोर्ट तैयार हुई।


विशेष जांच दल (SIT) के प्रमुख एसीपी डॉ. रजनीश कश्यप ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। लिगेचर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी, बल्कि इसे अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं, मृतका के पिता ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि फंदे में इस्तेमाल की गई बेल्ट प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।


लिगेचर मटेरियल का महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार, फंदे की चौड़ाई, बनावट और उसके दबाव के निशानों का मिलान मृतक के गले पर मौजूद निशानों से किया जाता है, जिससे हत्या के कारणों का सही पता लगाया जा सके। यह जांच आत्महत्या और हत्या के बीच अंतर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ट्विशा मामले में यह प्रक्रिया प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान पूरी नहीं हो सकी, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।