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भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए RBI और सरकार का नया कदम

भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने की योजना बना रहे हैं, जिससे रुपये की स्थिति में सुधार हो सकता है और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार और RBI मिलकर महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉंड पर लगने वाले टैक्स में कटौती की जा सकती है। यह कदम भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
 

नई नीति से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली। भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने की योजना बना रहे हैं। इस कदम से रुपये की स्थिति में सुधार हो सकता है और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था और डेट मार्केट में एक बड़ा नीतिगत परिवर्तन देखने को मिल सकता है। रुपये पर बढ़ते दबाव और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार और RBI मिलकर महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय कैबिनेट इस हफ्ते एक प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जो विदेशी फंड्स के लिए भारतीय बॉंड में निवेश को सस्ता बना देगा।

बॉंड टैक्स में कटौती की योजना
प्रस्ताव के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बॉंड से प्राप्त ब्याज पर लगने वाले 20% टैक्स को या तो समाप्त किया जा सकता है या इसमें बड़ी कटौती की जा सकती है। इसका उद्देश्य वैश्विक मार्केट के अनुरूप टैक्स संरचना बनाना है, ताकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय डेट मार्केट में अधिक निवेश कर सकें।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय और RBI ने टिप्पणी के अनुरोधों का उत्तर नहीं दिया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केंद्रीय बैंक ने पहले विदेशी बॉंड निवेशकों पर टैक्स कम करने की सिफारिश की थी।

इसके अतिरिक्त, RBI विदेशी निवेशकों के लिए बिना किसी निवेश सीमा के कुछ लंबी अवधि के सॉवरेन बॉंड खरीदने के रास्ते फिर से खोल सकता है। 2024 में, RBI ने 14 और 30 साल वाले सरकारी प्रतिभूतियों को Fully Accessible Route (FAR) लिस्ट से हटा दिया था, लेकिन अब इस लिस्ट को फिर से बढ़ाया जा सकता है।

यह कदम क्यों उठाया जा रहा है?
इस वर्ष भारतीय रुपया काफी उतार-चढ़ाव से गुजरा है और 20 मई को डॉलर के मुकाबले 96.9650 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद से रुपये को स्थिर करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक लगातार प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि, रुपये में गिरावट के अन्य कारण भी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, अमेरिकी टैरिफ से व्यापार तनाव और ईरान संघर्ष के कारण भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आउटफ्लो को रोकने के लिए यह ‘टैक्स इंसेंटिव’ आवश्यक हो गया है।

इसके अलावा, सरकार Persons Resident Outside India (PROIs) के लिए पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत लिस्टेड भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश करने के नियमों को अधिसूचित कर सकती है। इससे NRI और विदेशी व्यक्तियों के लिए भारतीय इक्विटी मार्केट में सीधे निवेश करना आसान हो जाएगा।

यदि टैक्स में कमी आती है, तो भारत के सरकारी बॉंड्स की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी, जिससे बॉंड की कीमतें बढ़ेंगी और यील्ड्स में कमी आएगी। इसका सीधा लाभ उन बैंकों को होगा जिनके पास सरकारी सिक्योरिटीज का बड़ा पोर्टफोलियो है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल इस हफ्ते उन प्रस्तावों पर विचार कर सकता है, जिनसे भारतीय बांडों में निवेश करने वाले विदेशी फंडों पर कर का बोझ कम हो सकता है।