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भारत में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती: जानें इसके पीछे की वजहें

भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिसका उद्देश्य तेल कंपनियों पर वित्तीय बोझ को कम करना है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और ऊर्जा संकट के बीच, यह कदम आम जनता को अप्रत्यक्ष राहत प्रदान करेगा। जानें कि इस कटौती का क्या प्रभाव पड़ेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों का ब्रेकडाउन कैसे होता है।
 

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने के कारण भारत में तेल के आयात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस कठिनाई के बीच, सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी की है। ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे पाकिस्तान, चीन, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। इसके विपरीत, भारत ने तेल कंपनियों के दबाव को कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, ताकि उन्हें कीमतें बढ़ाने की आवश्यकता न पड़े।

क्यों घटाई गई एक्साइज ड्यूटी
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इस वृद्धि के कारण, तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। सरकार ने इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कमी की है। विशेष रूप से, पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटाकर 3 रुपये कर दी गई है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। इस कटौती का लाभ सीधे तौर पर तेल कंपनियों को होगा, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से आम जनता को राहत मिलेगी, क्योंकि कंपनियों को कीमतें बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों का विश्लेषण
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई प्रकार के टैक्स शामिल होते हैं। कच्चे तेल और रिफाइनिंग की हिस्सेदारी 45%, केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी 25%, राज्य टैक्स 20% और डीलर कमीशन 10% होता है।

पेट्रोल पर लगने वाले मुख्य टैक्स:
केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूलती है, जिसमें शामिल हैं:

1. बेसिक एक्साइज ड्यूटी – 1.4 रुपये
2. स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी – 3 रुपये (पहले 13 रुपये था)
3. एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट सेस - 2.5 रुपये
4. एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस)- 5 रुपये

इसी तरह, डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपये है, जिसमें शामिल हैं:

1. बेसिक एक्साइज ड्यूटी – 1.8 रुपये
2. स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी – 0 (जो पहले 10 रुपये था)
3. एग्रीकल्चर और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेस – 4 रुपये
4. एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस) – 2 रुपये

सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 10 रुपये घटाकर 11.90 रुपये और डीजल पर 17.8 रुपये से घटाकर 7.8 रुपये कर दिया है।

सरकार की कमाई का विश्लेषण
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि रिफाइनरी से उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल-डीजल की कीमतें दोगुनी हो जाती हैं। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 15.40 रुपये वैट लगता है, जो राज्य सरकार के खाते में जाता है। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के रूप में 21.90 रुपये वसूलती है। इसके अलावा, डीलर कमीशन 4.40 रुपये होता है। इस प्रकार, जो पेट्रोल 74.97 रुपये प्रति लीटर रिफाइनरी से निकलता है, वह उपभोक्ता तक 94.77 रुपये प्रति लीटर पर पहुंचता है। इसी तरह, डीजल की कीमत भी इसी प्रकार बढ़ती है।

एक्साइज ड्यूटी का महत्व
एक्साइज ड्यूटी भारत में निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है। यह टैक्स आमतौर पर शराब, पेट्रोलियम उत्पादों और तंबाकू जैसी वस्तुओं पर लगाया जाता है, जो जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।