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भारत में ईंधन की कीमतों में स्थिरता, लेकिन उद्योगों की चालाकी से बढ़ी चिंता

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन बड़े उद्योगों द्वारा रिटेल पंपों से सस्ता डीजल खरीदने की चालाकी से स्थिति गंभीर हो गई है। सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कमी का खतरा बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने इस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

ईंधन की कीमतों में स्थिरता के बावजूद उद्योगों की चालाकी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि महंगाई के इस दौर में आम जनता, किसानों और नौकरीपेशा लोगों पर ईंधन का अतिरिक्त बोझ न पड़े। हालांकि, अब बड़े उद्योग इस राहत का गलत फायदा उठा रहे हैं। मुनाफे की लालसा में कई औद्योगिक इकाइयां थोक सप्लाई के बजाय सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीदने लगी हैं। इस स्थिति से सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है, और आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कमी का खतरा भी बढ़ गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार ने राज्यों को ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.


54 रुपये का बड़ा अंतर बना मुख्य वजह

इस समस्या की जड़ कीमतों के बीच का बड़ा अंतर है। 28 मई के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में रिटेल डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि औद्योगिक उपयोग के लिए बल्क डीजल की कीमत 149 रुपये प्रति लीटर है। इस प्रकार, प्रति लीटर 54 रुपये का बड़ा अंतर है। औद्योगिक ग्राहकों के लिए ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तय होती हैं, जबकि आम जनता को राहत देने के लिए रिटेल कीमतें सरकार द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। इस अंतर का फायदा उठाते हुए उद्योग अपने बल्क कोटे को छोड़कर आम पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं.


सरकारी कंपनियों को रोजाना 550 करोड़ का घाटा

इस बड़े पैमाने पर हो रही हेराफेरी का सबसे बुरा असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर पड़ रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस पर इन कंपनियों को प्रतिदिन औसतन 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। जो सब्सिडी या वित्तीय राहत आम जनता के लिए दी जा रही थी, उसका एक बड़ा हिस्सा अब उद्योग अपने मुनाफे के रूप में ले रहे हैं। यह स्थिति आर्थिक दृष्टि से टिकाऊ नहीं है.


गड़बड़ी करने वालों पर चलेगा कानूनी डंडा

आम लोगों के हिस्से का ईंधन सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने सक्रिय कदम उठाए हैं। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे विशेष टीमें बनाएं और पेट्रोल पंपों की निगरानी करें। यदि कोई व्यक्ति या कंपनी कालाबाजारी, अवैध भंडारण या गलत तरीके से रिटेल तेल की खरीद-फरोख्त करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है, इसलिए आम लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है.