बोस्टन में उल्कापिंड के विस्फोट से मची अफरा-तफरी
अमेरिका में उल्कापिंड का विस्फोट
बोस्टन, अमेरिका में एक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। कुछ लोगों ने इसे बम विस्फोट समझा, जबकि अन्य ने भूकंप का अनुमान लगाया और घरों से बाहर भागने लगे। लेकिन कुछ ही समय बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह घटना धरती से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से आई थी। न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में शनिवार दोपहर अचानक एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ। इस धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई लोगों ने जमीन के हिलने की शिकायत की। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हो गए। नासा ने बाद में बताया कि यह कोई आतंकवादी हमला या भूकंप नहीं था, बल्कि एक विशाल उल्कापिंड था जो वायुमंडल में प्रवेश करते ही फट गया।
उल्कापिंड की गति और विस्फोट की तीव्रता
ABC न्यूज के अनुसार, नासा ने बताया कि यह उल्कापिंड, जिसे ‘फायरबॉल’ कहा गया, स्थानीय समयानुसार दोपहर 2:06 बजे दर्ज किया गया। इसकी गति लगभग 120700 किमी प्रति घंटे थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उल्कापिंड उत्तर पूर्वी मैसाचुसेट्स और दक्षिण पूर्वी न्यू हैम्पशायर के ऊपर लगभग 64 किमी की ऊंचाई पर पहुंचकर कई टुकड़ों में टूट गया, जिसके परिणामस्वरूप यह जोरदार धमाका हुआ।
नासा के अनुसार, उल्कापिंड के टूटने से उत्पन्न ऊर्जा लगभग 300 टन TNT विस्फोटक के बराबर थी। तुलना के लिए, 2020 में बेरूत में हुए धमाके की ऊर्जा 200-400 टन के बीच थी, जिसने शहर के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया था। इस विस्फोट के कारण लोगों ने न केवल तेज आवाज सुनी, बल्कि कई क्षेत्रों में हल्का कंपन भी महसूस किया। यह एक ऐसा अंतरिक्षीय विस्फोट था जिसकी गूंज धरती तक पहुंच गई।
पुलिस और नासा की प्रतिक्रिया
रिपोर्टों के अनुसार, वाटरटाउन पुलिस विभाग को पूर्वी मैसाचुसेट्स के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार फोन कॉल मिल रहे थे, जिसमें लोग विस्फोट के कारण के बारे में पूछ रहे थे। पुलिस ने कहा कि उन्हें कई लोगों से तेज धमाके की सूचना मिली है, लेकिन किसी प्रकार के खतरे या नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है। मैसाचुसेट्स ऑफिस ऑफ पब्लिक सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ने भी पुष्टि की कि कई क्षेत्रों में लोगों ने तेज आवाज और हल्का कंपन महसूस किया। राहत की बात यह है कि किसी भी प्रकार के नुकसान, आग या आपातकालीन स्थिति की कोई सूचना नहीं मिली। नासा ने स्पष्ट किया कि यह किसी सक्रिय उल्का वर्षा का हिस्सा नहीं था। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह एक प्राकृतिक अंतरिक्षीय वस्तु थी, न कि कोई अंतरिक्ष मलबा या पृथ्वी पर गिरता हुआ सैटेलाइट। वैज्ञानिकों के अनुसार, रोजाना छोटे उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, लेकिन इतनी तेज गति वाले बड़े फायरबॉल कम ही देखे जाते हैं। इस बार राहत की बात यह रही कि उल्कापिंड जमीन तक पहुंचने से पहले ही 40 मील ऊपर फट गया। यदि इसका बड़ा हिस्सा धरती पर गिरता, तो नुकसान कहीं अधिक गंभीर हो सकता था।