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बच्चा बाजी: एक घिनौनी कुप्रथा का पर्दाफाश

बच्चा बाजी एक घिनौनी प्रथा है जिसमें छोटे लड़कों को पार्टियों में नृत्य करने के लिए मजबूर किया जाता है। इस प्रथा के तहत उन्हें लड़कियों के कपड़े पहनाए जाते हैं और यौन शोषण का शिकार बनाया जाता है। गरीबी के कारण ये बच्चे इस दलदल में फंसते हैं। इस विषय पर 2010 में एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी है, जो इस कुप्रथा की सच्चाई को उजागर करती है। जानें इस प्रथा के बारे में और भी जानकारी।
 

बच्चा बाजी की कुप्रथा


बच्चा बाजी एक ऐसी सामाजिक बुराई है, जिसमें प्रभावशाली लोग लगभग 10 साल के लड़कों को पार्टियों में नृत्य करने के लिए मजबूर करते हैं। इन बच्चों को लड़कियों के कपड़े पहनाए जाते हैं और उनके चेहरे पर मेकअप किया जाता है। इसके बाद, इन छोटे लड़कों का यौन शोषण और बलात्कार भी किया जाता है।


ये बच्चे लगातार अत्याचार का शिकार होते हैं और इस घिनौनी प्रथा में फंसते जाते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि इस कुप्रथा का शिकार केवल छोटे लड़के ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी होती हैं। यही कारण है कि इस प्रथा के खिलाफ हमेशा से आवाज उठाई जाती रही है।


क्यों फंसते हैं बच्चे इस दलदल में?

जिन बच्चों को पार्टियों में नृत्य करने के लिए भेजा जाता है, वे अक्सर गरीबी के कारण इस काम के लिए मजबूर होते हैं। बेहतर जीवन की तलाश में ये बच्चे इस ओर आकर्षित होते हैं, और कई बार इन्हें अगवा कर लिया जाता है और अभिजात वर्ग के लोगों को बेच दिया जाता है। इन बच्चों को इस काम के बदले केवल कपड़े और खाना ही मिलता है।


धनवान लोग इन बच्चों को खरीदकर अपने इच्छानुसार उपयोग करते हैं।


इस विषय पर बनी डॉक्यूमेंट्री

अफगानिस्तान में समलैंगिकता को गैर-इस्लामिक और अनैतिक माना जाता है, लेकिन बच्चा बाजी की प्रथा वहां आम है। इन बच्चों को 'लौंडे' या 'बच्चा बेरीश' के नाम से जाना जाता है। इस विषय पर 2010 में 'द डांसिंग बॉयज ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान' नामक एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई थी, जिसका निर्देशन अफगान पत्रकार नजीबुल्लाह कुरैशी ने किया था।