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गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड में नया विवाद: चेयरमैन और पूर्व सेना अधिकारी के बीच आरोप-प्रत्यारोप

गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें चेयरमैन और एक पूर्व सेना अधिकारी के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है। सहायक लोको पायलट भर्ती में चल रही सीबीआई जांच के बीच, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट की ज्वाइनिंग को लेकर दोनों पक्षों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले ने रेलवे महकमे में हलचल मचा दी है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

गोरखपुर में रेलवे भर्ती बोर्ड का नया विवाद

गोरखपुर। रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) गोरखपुर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सहायक लोको पायलट भर्ती में चल रही सीबीआई जांच अभी समाप्त नहीं हुई थी कि अब नए चेयरमैन और एक पूर्व सेना अधिकारी के बीच नर्सिंग सुपरिटेंडेंट की ज्वाइनिंग को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए महाप्रबंधक और उच्चाधिकारियों को शिकायतें भेजी हैं, जिससे रेलवे महकमे में हलचल मच गई है।


गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास


पूर्व सेना अधिकारी ने चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाए


पूर्व सेना अधिकारी मेजर नेहा सिंह ने आरआरबी के अध्यक्ष पंकज जायसवाल पर दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को भेजे पत्र और ईमेल में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।


चेयरमैन का जवाब


आरआरबी अध्यक्ष ने प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (पीसीपीओ) को पत्र लिखकर पलटवार किया है। उन्होंने नेहा सिंह पर अनावश्यक दबाव बनाने और कार्यालय में अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं कि ज्वाइनिंग में देरी की असली वजह क्या है।


भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास


आरआरबी गोरखपुर में भ्रष्टाचार की कहानी नई नहीं है। 2018-19 में सहायक लोको पायलट (एएलपी) की भर्ती के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ सामने आई थीं। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन ने कर्मचारियों की मिलीभगत से पैनल बनाने, मेडिकल जांच और अभिलेखों की जांच में हेराफेरी करवाई। दफ्तर में धन उगाही का ऐसा बाजार गर्म हुआ कि अधिकारी-कर्मचारी गिरोह बनाकर मनमानी नियुक्तियाँ करने लगे।


चेयरमैन का निलंबन और बहाली


नवंबर 2022 में मामला उजागर होने पर रेलवे बोर्ड ने तत्कालीन चेयरमैन पीके राय को हटा दिया, जो बाद में सेवामुक्त भी हो गए। इस मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। लेकिन अध्यक्ष बदलने के बाद भी मनमानी नहीं रुकी। नए चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी के कार्यकाल में भी कार्यालय के दो कर्मचारियों ने 26 अप्रैल, 2024 को जारी पैनल में फर्जी तरीके से अपने बेटों का नाम शामिल कर दिया। बरेली में जब यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया तो रेलवे प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए।


इस प्रकरण में नुरुद्दीन अंसारी को निलंबित किया गया था, हालाँकि बाद में उनका निलंबन बहाल कर दिया गया। फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारी चंद्र शेखर आर्या और राम सजीवन इस समय कैंट थाने में गैंगस्टर के आरोपी हैं। कई अन्य कर्मचारियों को मूल विभागों में वापस भेज दिया गया, कुछ का स्थानांतरण हुआ, लेकिन आरआरबी गोरखपुर की छवि पर लगा दाग धुलता नहीं दिख रहा। अब चेयरमैन और अभ्यर्थी के बीच नई तकरार ने एक बार फिर इस कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।