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ईरान युद्ध के बीच पेंटागन का लीक हुआ ईमेल: स्पेन को नाटो से बाहर करने की मांग

ईरान के संघर्ष के बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग का एक गुप्त ईमेल लीक हुआ है, जिसमें स्पेन को नाटो से बाहर करने की मांग की गई है। इस ईमेल में पेंटागन ने स्पेन के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं, जिसमें अमेरिका के खिलाफ बयानबाजी और एयरस्पेस बंद करने का उल्लेख है। इसके अलावा, ईमेल में नाटो के भीतर अच्छे और बुरे देशों की सूची बनाने की चर्चा भी की गई है। जानें इस ईमेल में और क्या महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं।
 

पेंटागन का सीक्रेट ईमेल लीक

ईरान के संघर्ष के दौरान, अमेरिकी रक्षा विभाग का एक गुप्त ईमेल सार्वजनिक हुआ है। समाचार एजेंसी के अनुसार, इस ईमेल में पेंटागन ने स्पेन को नाटो से बाहर करने की मांग की है। ईरान के खिलाफ युद्ध में स्पेन ने अमेरिका का खुलकर विरोध किया था। यह ईमेल उस समय सामने आया है जब अमेरिका नाटो के लिए अच्छे और बुरे देशों की सूची बनाने पर विचार कर रहा था।


नाटो से स्पेन को बाहर करो…अमेरिकी रक्षा विभाग का सीक्रेट ईमेल लीक, जानिए क्या-क्या है?


रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने कहा है कि स्पेन ने युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया और ईरान के समर्थन में बयान दिए। इस कारण उसे नाटो में बनाए रखना उचित नहीं है। इसके अलावा, स्पेन ने युद्ध के दौरान अमेरिका के लिए अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया था।


ईमेल में अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

पेंटागन के ईमेल में और क्या-क्या है?


1. अर्जेंटीना के फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन के दावे का पुनर्मूल्यांकन करना। अमेरिका यह देखेगा कि क्या ब्रिटेन का दावा अब भी मान्य है।


2. नाटो से उन देशों को बाहर करने की बात करना जिन्होंने ईरान युद्ध में अमेरिका की स्थिति को कमजोर किया। इस सूची में तुर्की और ब्रिटेन का नाम शामिल है।


3. ईमेल में नाटो से बाहर निकलने का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ईरान युद्ध के बाद भी नाटो का हिस्सा बना रहेगा।


अमेरिका की अच्छे और बुरे देशों की सूची

अमेरिका ने तैयार किया है अच्छे और बुरे देशों की सूची


एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के बाद अमेरिका ने नाटो के भीतर अच्छे और बुरे देशों की एक सूची बनाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, जो देश नाटो के लिए रक्षा खर्च बढ़ाते हैं और अमेरिका का समर्थन करते हैं, उन्हें आदर्श सहयोगी माना जाएगा।


अच्छे देशों की सूची में पोलैंड, जर्मनी, बाल्टिक देशों (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया), चेक रिपब्लिक और अल्बानिया शामिल हैं। हालांकि, पोलैंड के रक्षा मंत्री ने अमेरिका की नीयत पर सवाल उठाए हैं, यह कहते हुए कि अमेरिका संकट के समय उनका समर्थन करेगा, इस पर भरोसा नहीं है।