ईरान में चीन की नई सैन्य भूमिका: अमेरिका और इजराइल के लिए खतरा
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में चीन की नई सैन्य भूमिका ने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है। हाल की खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ईरान को नया एयर डिफेंस सिस्टम प्रदान करने की योजना बना रहा है। यह सहयोग ईरान की सैन्य ताकत को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इस बीच, अमेरिका और चीन के बीच उच्च स्तरीय बातचीत भी हुई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। जानें इस संघर्ष का नया मोड़ और चीन की भूमिका के बारे में।
Apr 11, 2026, 20:10 IST
चीन की सैन्य सहायता से ईरान की तैयारी
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में चीन की एंट्री ने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ईरान अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने में जुटा हुआ है। हाल की खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नया एयर डिफेंस सिस्टम प्रदान करने की योजना बना रहा है। यह जानकारी सामने आई है कि ईरान सीज फायर का लाभ उठाकर अपने हथियारों का जखीरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें विदेशी सहयोग का भी सहारा लिया जा रहा है।
चीन का एंटी एयर मिसाइल सिस्टम
सूत्रों के अनुसार, चीन कंधे से दागे जाने वाले एंटी एयर मिसाइल सिस्टम, जिन्हें मैनपैड्स कहा जाता है, ईरान को भेजने की तैयारी कर रहा है। ये हथियार कम ऊंचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टरों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। हाल के संघर्ष में इन सिस्टमों ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट के लिए खतरा उत्पन्न किया था। यदि सीज फायर टूटता है, तो ये हथियार अमेरिका और इजराइल के लिए एक नई चुनौती बन सकते हैं।
चीन और ईरान के बीच तकनीकी सहयोग
हाल ही में एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराने की घटना में एक हैंड हेल्ड हीट स्किंग मिसाइल का उपयोग किया गया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह चीन में निर्मित था या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह चीन की सीधी भागीदारी को दर्शाता है। चीन और ईरान के बीच तकनीकी सहयोग कोई नई बात नहीं है, और यदि सीधे हथियारों का ट्रांसफर होता है, तो यह सहयोग एक नए स्तर पर पहुंच जाएगा।
कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य
बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात इस स्थिति पर असर डाल सकती है। वाइट हाउस ने संकेत दिया है कि हाल ही में ईरान के सीज फायर वार्ता के दौरान अमेरिका और चीन के बीच उच्च स्तरीय बातचीत हुई थी। चीन इस संघर्ष में खुलकर शामिल होने से बचना चाहता है, क्योंकि उसे पता है कि अमेरिका और इजराइल इसके खिलाफ होंगे।
चीन का आधिकारिक बयान
चीन ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह एक जिम्मेदार देश है, जो युद्ध को समाप्त करने और सीज फायर को बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। लेकिन सवाल यह है कि यदि सब कुछ स्पष्ट है, तो खुफिया रिपोर्टों में बार-बार चीन का नाम क्यों लिया जा रहा है? यह संघर्ष अब केवल ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच नहीं रह गया है।