ईरान पर अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा
अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद
नई दिल्ली। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद अब स्पष्ट रूप से उभरने लगे हैं। हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन कॉल में तनाव का माहौल था। दोनों नेताओं के बीच मुख्य विवाद यह था कि क्या ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई की जाए या फिर बातचीत के माध्यम से समझौते की कोशिश जारी रखी जाए।
नेतन्याहू का सैन्य कार्रवाई का समर्थन
रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए फिर से हमले की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि फोन कॉल के बाद नेतन्याहू काफी नाराज और चिंतित नजर आए। कहा गया कि वह गुस्से में थे।
शांति प्रस्ताव की तैयारी
ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्होंने ईरान पर संभावित हमले को टाल दिया है। कतर, UAE और अन्य अरब देशों ने अमेरिका से तनाव कम करने की अपील की थी, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई को रोका गया। इसके साथ ही पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में एक नया शांति प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावनाएं बढ़ाना है।
बातचीत की संभावनाएं
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया कि मध्यस्थ देश एक "लेटर ऑफ इंटेंट" तैयार कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस प्रस्ताव के तहत 30 दिनों तक बातचीत होगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
इजरायल की चिंताएं
हालांकि, इजरायल इस प्रक्रिया को लेकर संशय में है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सरकार के एक बड़े हिस्से का मानना है कि ईरान जानबूझकर बातचीत को लंबा खींच रहा है। यही कारण है कि इजरायल फिर से सैन्य कार्रवाई के पक्ष में है।
संभावित युद्ध की चेतावनी
ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है, तो अमेरिका युद्ध का विकल्प अपना सकता है। उन्होंने कहा, "सब कुछ अब सीमा रेखा पर खड़ा है। यदि सही जवाब नहीं मिला, तो हालात तेजी से बदल सकते हैं।"
ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि वह अपने 14 सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ाएगा। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता जारी है, लेकिन किसी समझौते पर पहुंचना आसान नहीं है।
अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के मुद्दे पर एक ही पृष्ठ पर नहीं हैं। ट्रंप कूटनीति को एक मौका देना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू का मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका सैन्य कार्रवाई है।