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ईरान का अमेरिका को खुला पत्र: युद्ध की इच्छा नहीं, पर आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी नागरिकों के लिए एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने युद्ध की इच्छा न होने की बात कही है, लेकिन किसी भी आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है। पत्र में उन्होंने अमेरिकी जनता से अपील की है कि वे सोचें कि क्या इस युद्ध से उनके हितों की रक्षा हो रही है। ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों को आक्रामकता करार दिया है। इस पत्र के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।
 

तेहरान का संदेश


तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी नागरिकों के लिए एक खुला पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका देश युद्ध की इच्छा नहीं रखता, लेकिन किसी भी प्रकार के आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार है। यह पत्र उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया है।


पत्र में पेजेश्कियन ने अमेरिकी लोगों से आग्रह किया कि वे मीडिया और राजनीतिक प्रचार से परे जाकर सोचें और यह सवाल करें कि क्या इस युद्ध से अमेरिकी जनता के हितों की रक्षा हो रही है। उन्होंने लिखा:


“हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हम डरते नहीं हैं। ईरान ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया, लेकिन जो भी हम पर हमला करेगा, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।”


पत्र की मुख्य बातें


  • ईरान अमेरिकी, यूरोपीय या पड़ोसी देशों की जनता के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखता।

  • अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हो रहे हमलों को “आक्रामकता” और “युद्ध अपराध” करार दिया गया।

  • अमेरिकी जनता से सवाल किया गया कि “America First” नीति के तहत इस युद्ध से उनके हित कैसे साधे जा रहे हैं।

  • दुनिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है — टकराव का रास्ता महंगा और व्यर्थ है, बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है।

  • ईरान की कार्रवाई को “वैध आत्मरक्षा” के रूप में प्रस्तुत किया गया।


राष्ट्रपति का संदेश

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान की सेना और जनता मजबूत हैं और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने नेताओं से पूछें कि इस युद्ध का अंत किसके हित में होगा।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया


  • अमेरिकी प्रशासन ने इस पत्र को “प्रोपगैंडा” बताया है।

  • इजरायल ने इसे “कमजोरी का प्रदर्शन” कहा है।

  • कई यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है कि पत्र के बावजूद तनाव बढ़ सकता है।

  • संयुक्त राष्ट्र में ईरान-अमेरिका मुद्दे पर फिर से बहस की मांग उठ रही है।


पृष्ठभूमि

यह पत्र उस समय आया है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं। ट्रंप प्रशासन ने ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने का दावा किया है, जबकि ईरान खुद को मजबूत बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है।


ईरानी मीडिया ने इस पत्र को “शांति का संदेश” बताया है, जबकि पश्चिमी मीडिया इसे “रणनीतिक चाल” मानता है।


अपडेट: स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अगले कुछ दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन की भी उम्मीद है। दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ने या बातचीत शुरू होने पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।