ईरान-अमेरिका तनाव: होरमुज़ जलडमरूमध्य में भारतीय टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही
होरमुज़ जलडमरूमध्य का महत्व
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बना दिया है। अमेरिका ने इस क्षेत्र की नाकेबंदी का दावा किया है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बावजूद, कई तेल और एलपीजी टैंकर चुपचाप मुंबई और अन्य भारतीय बंदरगाहों तक पहुँचने में सफल रहे हैं।
नौसेना की शक्ति और समुद्री भूगोल
ईरान के विरोध के चलते अमेरिकी नौसेना को ओमान की खाड़ी में तैनात किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरानी व्यापार को रोकना था। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नौसेना की शक्ति की सीमाएँ हैं। हाल ही में कतर से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया भारतीय टैंकर 'देश गरिमा' इसका उदाहरण है। ईरानी हमलों के खतरे के बावजूद, यह जहाज सुरक्षित मुंबई पहुँचा। रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल से अब तक 30 से अधिक टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं।
जहाजों के बचने के तरीके
विशेषज्ञों ने उन संभावित मार्गों की पहचान की है जिनका उपयोग भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाज कर रहे हैं। पहला मार्ग मकरान तट और पाकिस्तान का समुद्री क्षेत्र है, जहाँ जहाज ईरान के जल से सटकर सीधे पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, अमेरिकी नौसेना दूसरे देश के समुद्री क्षेत्र में जहाजों को रोक नहीं सकती।
दूसरा मार्ग चाबहार बंदरगाह तक जाने का है। यहाँ से जहाज दक्षिण की ओर मुड़कर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश करते हैं और सीधे महाराष्ट्र, गुजरात या कर्नाटक के तटों तक पहुँच जाते हैं।
भारत के लिए पाकिस्तान का मार्ग
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बावजूद, समुद्री व्यापार के नियम अलग हैं। भारतीय व्यापारिक जहाजों को पाकिस्तानी जलक्षेत्र से गुजरने में कोई रोक नहीं है, बशर्ते वे वहाँ रुकें नहीं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में होरमुज़ जलडमरूमध्य में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी राजनयिक और तकनीकी विकल्पों का उपयोग कर रहा है।
अमेरिकी नाकेबंदी की सीमाएँ
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 28 जहाजों को वापस लौटने का निर्देश दिया है। हालाँकि, एक बार जब कोई तेल का टैंकर किसी देश के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर जाता है, तो वह अमेरिकी सेनाओं की पहुँच से बाहर हो जाता है। अमेरिका का कहना है कि इस नाकेबंदी से ईरान के तेल से होने वाली कमाई को नुकसान पहुँच रहा है, लेकिन नाकेबंदी को पूरी तरह से अभेद्य बनाना मुश्किल है।