इंदौर में पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण की अनोखी पहल
प्रकृति के प्रति समर्पण
इंदौर में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मेडिकल सोशल वर्कर पूजा अहिरवार ने अपने 32वें जन्मदिन पर देवगुराडिया पहाड़ी पर 111 पौधे लगाए। इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मश्री पुरस्कार विजेता जनक पलटा मगिलिगन भी उपस्थित थीं, जिनकी प्रेरणा से यह आयोजन संभव हुआ।
पूजा का पर्यावरण के प्रति समर्पण
पूजा अहिरवार, जो ICMR-NITHR जबलपुर और तपस्या नारी सेवा समिति चैरिटेबल ट्रस्ट की सचिव हैं, ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से अपने जन्मदिन को पौधारोपण के माध्यम से मनाती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रेरणा उन्हें पद्मश्री जनक पलटा मगिलिगन के एक कार्यक्रम से मिली, जिसमें 75 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया था। तभी से उन्होंने हर साल अपने जन्मदिन को प्रकृति को समर्पित करने का संकल्प लिया।
जनक पलटा मगिलिगन का संदेश
इस अवसर पर जनक पलटा मगिलिगन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि लोग अपने महत्वपूर्ण अवसरों को पौधारोपण से जोड़ें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य समारोहों में प्लास्टिक गुब्बारे और थर्माकोल का उपयोग न करने की अपील की।
सामुदायिक प्रयास
कार्यक्रम के दौरान इंदौर वन विभाग की रेंजर संगीता ठाकुर, देवगुराडिया क्षेत्र के प्रवीण मालवीय और साइन्टेक इको फाउंडेशन की टीम ने भी सक्रिय सहयोग दिया। सभी ने मिलकर पौधारोपण अभियान को सफल बनाया और इसे सामुदायिक प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया।
छात्रों की भागीदारी
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के सोशल वर्क और अन्य विषयों के विद्यार्थियों ने भी इस पहल में उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्रों ने न केवल पौधारोपण किया, बल्कि यह संकल्प भी लिया कि वे भविष्य में अपने विशेष अवसरों पर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देंगे।
सतत अभियान का संकल्प
पूजा अहिरवार ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रयास केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि एक सतत अभियान है, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित और स्वच्छ वातावरण तैयार करना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पौधों की देखभाल और संरक्षण का संकल्प लिया। यह पहल स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल के रूप में देखी जा रही है, जो समाज में हरियाली और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।