वट सावित्री व्रत के लिए भोग की सूची: जानें क्या अर्पित करें
वट सावित्री व्रत का महत्व
16 मई को वट सावित्री का व्रत मनाया जाएगा, जिसे बरसाइत पूजा भी कहा जाता है। यह पर्व खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए इसे करती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें कच्चा सूत बांधना और वृक्ष की परिक्रमा करना शामिल है। ऐसा करने से महिलाओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और उनके पतियों पर आने वाले संकट टल जाते हैं। इस व्रत में पूजा के साथ-साथ भोग का भी विशेष महत्व है।
वट सावित्री व्रत की भोग सामग्री
वट सावित्री व्रत के लिए भोग की पूरी सूची
भीगे हुए काले चने: इस पूजा में भीगे हुए काले चने का विशेष महत्व है। सावित्री और सत्यवान की कथा में चने का उल्लेख मिलता है। पूजा के बाद 7 या 11 चने खाकर व्रत खोलने की परंपरा है।
मौसमी फल: वट सावित्री पूजा में मौसमी फलों, खासकर आम और लीची, का होना आवश्यक है।
गुलगुले या मीठे पुए: आटे और गुड़ से बने गुलगुले या पुए का भोग भी अर्पित किया जाता है, जो बरगद के फल का प्रतीक माने जाते हैं।
पकवान (पूरी और हलवा): कुछ स्थानों पर व्रत के दिन शुद्ध घी में बनी पूरी और सूजी या आटे का हलवा अर्पित किया जाता है।
मिठाई: पूजा सामग्री में मिठाई भी शामिल करें, क्योंकि इसका भोग लगाना शुभ माना जाता है।
भोग लगाते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- भोग की सामग्री को एक थाली में रखकर वृक्ष की जड़ के पास रखें।
- भोग हमेशा शुद्ध घी में और पूरी तरह सात्विक तरीके से बनाएं।
- पूजा के बाद, भोग की सामग्री, फल और कुछ दक्षिणा अपनी सास या घर की बुजुर्ग महिला को देकर उनका आशीर्वाद लें।
- पूजा संपन्न होने के बाद, चने और पानी के साथ अपना व्रत खोलें।
- चढ़ाया गया भोग घर के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटें और ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भी दान दें।