×

संगीतकार सुदेश भोसले का दिलचस्प सफर: 45 साल की यात्रा और एक खौफनाक अनुभव

संगीत जगत के दिग्गज सुदेश भोसले ने अपने 45 साल के करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने एक खौफनाक अनुभव साझा किया, जब वे 1993 में कोलंबो में एक आत्मघाती हमले के करीब थे। इस घटना ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। भोसले ने अपनी यात्रा और संगीत में अपने योगदान के बारे में भी बात की। जानें उनके अनुभव और आगामी कार्यक्रम के बारे में।
 

सुदेश भोसले का नवभारत उत्सव में आगमन

सुदेश भोसले का नवभारत-नवराष्ट्र इंटरव्यू: नागपुर में आज सुरेश भट सभागृह में आयोजित होने वाले 'नवभारत उत्सव' के लिए प्रसिद्ध गायक सुदेश भोसले ने शुक्रवार को संपादकीय टीम के साथ बातचीत की। अपनी अद्भुत आवाज और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाने वाले सुदेश ने अपने 45 साल के करियर के अनुभव साझा किए, जिसमें सफलता के साथ-साथ कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा।


1993 का काला दिन: जब स्टेज बना 'डेथ ट्रैप'

सुदेश ने 1993 में हुए एक भयानक घटना को याद किया, जब वे लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की टीम के साथ कोलंबो में परफॉर्म कर रहे थे। इस टीम में कई प्रसिद्ध कलाकार शामिल थे। उन्होंने बताया, 'वहां तत्कालीन राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा का एक जुलूस निकल रहा था।'


लिट्टे (LTTE) ने उन्हें मारने के लिए कई स्थानों पर साजिश रची थी, और दुर्भाग्यवश, उनका परफॉर्मिंग स्टेज उस साजिश का अंतिम पड़ाव था। स्टेज के नीचे भारी मात्रा में विस्फोटक रखे गए थे। हम लाखों की भीड़ के सामने परफॉर्म करने के लिए तैयार थे, जबकि मौत हमारे पैरों के नीचे दबी हुई थी।'


धमाका और खौफनाक टैक्सी सफर

सुदेश ने आगे बताया कि जब राष्ट्रपति स्टेडियम पहुंचने वाले थे, तभी एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। धमाका इतना जोरदार था कि उसकी गूंज स्टेडियम तक सुनाई दी। राष्ट्रपति प्रेमदासा की मौके पर ही मौत हो गई। अफरा-तफरी के बीच भारतीय कलाकारों को तुरंत वहां से निकलने का आदेश दिया गया। सुदेश और संगीतकार प्यारेलाल एक टैक्सी में बैठकर एयरपोर्ट की ओर भागे।


सुदेश ने कहा, 'टैक्सी में प्यारेलाल जी ने दुखी होकर कहा कि राष्ट्रपति के साथ बहुत बुरा हुआ, यह सुनते ही टैक्सी ड्राइवर भड़क गया और बोला- जो हुआ अच्छा हुआ। हम सन्न रह गए और पूरे रास्ते खामोश रहे। बाद में समझ आया कि अगर वह धमाका रास्ते में न होता तो वह सीधा हमारे स्टेज पर होता और पूरा बॉलीवुड उस दिन खत्म हो जाता।'


45 साल से अपनी आवाज की खोज

अपने प्लेबैक सिंगिंग करियर में, सुदेश ने कई दिग्गजों को अपनी आवाज दी है। जब उनसे पूछा गया कि आज सुदेश भोसले कहां हैं, तो उन्होंने कहा, 'मैंने लगभग हर बड़े सुपरस्टार के लिए आवाज दी है। लोग मुझे 'वॉयस ऑफ बिग बी' कहते हैं, लेकिन सच यह है कि पिछले 45 साल से मैं भी उसी सुदेश भोसले को खोज रहा हूं।'


सुरों की महफिल का आयोजन

‘नवभारत’ अपने पाठकों के साथ 93 वर्षों के अटूट विश्वास और स्नेह का जश्न मना रहा है। इस कड़ी में 11 अप्रैल को 'सुरों से सजी, यादों से भरी एक संगीतमय शाम' में सुदेश भोसले शानदार प्रस्तुति देंगे। यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से रेशिमबाग स्थित सुरेश भट सभागृह में आयोजित होगा।


उनके साथ गायिका रूपाली आनंद और मकरंद पाटनकर भी अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे। कार्यक्रम के एसोसिएट स्पॉन्सर में भूमेश रिएल्टर्स, ल्यूमेन सोलर, शुभ आरंभ रियल इस्टेट, प्रोजोन पाम्स, वैनगंगा रियल्टीज, एचसीजी, मेट्रो ग्रुप, प्रफुल देशमुख, नाइल प्रॉपर्टीज, निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव और मर्कलैंड शामिल हैं।