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राजस्थान सरकार की खाद्य सुरक्षा योजना में सुधार, लाखों को मिली राहत

राजस्थान सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना में सुधार करते हुए लाखों जरूरतमंदों को राहत प्रदान की है। अब तक 93 लाख से अधिक पात्र लाभार्थियों को जोड़ा गया है, जिससे उन्हें निःशुल्क राशन मिल रहा है। इस योजना के तहत 'गिव इट अप अभियान' के माध्यम से अपात्र लाभार्थियों को हटाकर नए जरूरतमंदों को शामिल किया गया है। जानें इस पहल के पीछे की कहानी और इसके प्रभाव के बारे में।
 

खाद्य सुरक्षा योजना में महत्वपूर्ण बदलाव


जयपुर, 10 अप्रैल। राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए लाखों जरूरतमंदों को राहत प्रदान की है। अब तक 93 लाख से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें निःशुल्क राशन प्राप्त हो रहा है।


लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि कैसे हुई?

सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत रिक्त स्थानों को भरते हुए 2024 में लगभग 13 लाख नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ा।


इसके बाद, और अधिक जरूरतमंदों को जोड़ने के लिए “गिव इट अप अभियान” की शुरुआत की गई, जिससे योजना में कई स्थान खाली हुए।


गिव अप अभियान का प्रभाव

यह अभियान नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 1 नवंबर 2024 को शुरू किया गया। इसके तहत:



  • लगभग 55.40 लाख संपन्न परिवारों ने स्वेच्छा से अपनी खाद्य सब्सिडी छोड़ी।

  • 27 लाख से अधिक लाभार्थियों ने ई-केवाईसी नहीं करवाया, जिससे वे सूची से बाहर हो गए।


इन कारणों से बड़ी संख्या में रिक्तियां बनीं, जिनमें नए जरूरतमंदों को शामिल किया गया।


मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कदम

भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में 26 जनवरी 2025 को खाद्य सुरक्षा पोर्टल को फिर से शुरू किया गया।


इसके बाद:



  • 80 लाख से अधिक नए पात्र लाभार्थियों को योजना में जोड़ा गया।

  • कुल मिलाकर दिसंबर 2023 के बाद 93 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला


मंत्री का बयान

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि योजना का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे।


उन्होंने बताया कि:



“अपात्र लाभार्थियों को हटाकर उनकी जगह वास्तविक जरूरतमंदों को शामिल किया गया है, जिससे योजना अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है।”



वर्तमान स्थिति

राज्य में इस समय कुल 4.42 करोड़ से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा योजना के तहत निःशुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं।


निष्कर्ष

सरकार की यह पहल सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अपात्रों को हटाकर पात्रों को जोड़ने से न केवल योजना मजबूत हुई है, बल्कि यह सुनिश्चित हुआ है कि सही लोगों तक सही समय पर मदद पहुंचे