बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का संकट: डॉ. महरंग बलूच की कड़ी आलोचना
डॉ. महरंग बलूच का बयान
बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए, प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजेहती कमेटी की आयोजक डॉ. महरंग बलूच ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के खिलाफ जबरन गायब करने, गैर-न्यायिक हत्याओं और डराने-धमकाने की रणनीतियों को बढ़ावा दे रही है। डॉ. बलूच ने बलूचिस्तान की स्थिति को 'बेहद चिंताजनक' बताते हुए कहा कि राजनीतिक सक्रियता और मानवाधिकारों की वकालत के लिए गुंजाइश तेजी से घट रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय की मांग करने वाली शांतिपूर्ण आवाजों को डर और सरकारी दबाव के माध्यम से दबाया जा रहा है। डॉ. बलूच ने सवाल उठाया कि जब शांतिपूर्ण राजनीतिक मंचों को निशाना बनाया जा रहा है, तो आम नागरिकों के पास क्या विकल्प बचे हैं।
जेल में बंद कार्यकर्ताओं की स्थिति
डॉ. बलूच ने पाकिस्तान की न्यायिक और सरकारी संस्थाओं की भी आलोचना की, यह कहते हुए कि वे दुर्व्यवहार के पीड़ितों की रक्षा करने में असफल रही हैं। उन्होंने बीवाईसी सदस्य नज़र मर्री बलूच के लापता होने का मामला उठाया, जिनके परिवार की बार-बार अपीलों के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
इसके अलावा, उन्होंने ज़ीशान ज़हीर बलूच का भी जिक्र किया, जिनके पिता अप्रैल 2015 से लापता हैं। डॉ. बलूच ने कहा कि ज़ीशान ने अपने जीवन का अधिकांश समय इस सदमे में बिताया और जून 2025 में उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि उनके परिवार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
फौजिया बलूच का मामला
डॉ. बलूच ने कार्यकर्ता फौजिया बलूच का भी उल्लेख किया, जिनके भाई, लेखक दाद शाह को अप्रैल 2026 में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उनके घर से ले जाया गया था। उन्होंने कहा कि जब फौजिया ने विरोध किया, तो उन्हें और उनके रिश्तेदारों को हिरासत में लिया गया और रिहा होने से पहले उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
डॉ. बलूच ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे हस्तक्षेप करें और पाकिस्तान को बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट के लिए जिम्मेदार ठहराएं।