पैतृक संपत्ति पर लोन लेने के तरीके और कानूनी प्रावधान
पैतृक संपत्ति पर लोन की आवश्यकता
पैतृक संपत्ति लोन - आज के समय में महंगाई के चलते इमरजेंसी में लोन की आवश्यकता हर किसी को होती है। जब भी जरूरत पड़ती है, लोग लोन का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपने पूर्वजों की संपत्ति पर लोन लेने का विचार किया है? यदि हां, तो आइए जानते हैं इस प्रकार की संपत्ति के लिए कानूनी प्रावधान क्या हैं।
पैतृक संपत्ति के कानूनी प्रावधान
पैतृक संपत्ति के नियम-
यदि कोई संपत्ति पूरी तरह से दादा के नाम पर है, तो पोता उस संपत्ति का हिस्सेदार होते हुए भी उस पर लोन नहीं ले सकता। लोन लेने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को होता है जिसका नाम संपत्ति के रजिस्टर में है। जब तक संपत्ति का बंटवारा नहीं होता, यह केवल दादा के नाम पर ही दर्ज रहेगी, और पोता इस संपत्ति पर लोन नहीं ले सकता।
लोन लेने के अन्य विकल्प
लोन के लिए अन्य विकल्प-
हालांकि, यदि दादा के नाम पर संपत्ति है, तो पोता अन्य तरीकों से लोन ले सकता है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, पैतृक संपत्ति से लोन लेने के तीन तरीके हैं।
1. संपत्ति के मालिक को लोन गारंटर बनाना
गारंटर की आवश्यकता-
यदि पोता दादा की संपत्ति पर लोन लेना चाहता है, तो उसे दादा को लोन का गारंटर बनाना होगा। इसका मतलब है कि दादा बैंक को एक लिखित शपथ पत्र देंगे, जिसमें लोन की पूरी गारंटी होगी। यदि पोता लोन चुकाने में असमर्थ होता है, तो संपत्ति को बेचकर राशि वसूली जा सकती है।
2. को-अप्लिकेंट बनाकर लोन लेना
को-अप्लिकेंट का लाभ-
एक अन्य विकल्प यह है कि पोता अपने दादा या पिता को को-अप्लिकेंट बना सकता है। इससे लोन चुकाने की जिम्मेदारी दोनों पर समान रूप से होगी, जिससे बैंक को लोन देने में आसानी होगी।
3. गिफ्ट डीड के माध्यम से लोन लेना
गिफ्ट डीड का उपयोग-
तीसरा तरीका यह है कि संपत्ति के मालिक एक गिफ्ट डीड बनाकर संपत्ति का कुछ हिस्सा पोते के नाम कर सकते हैं। इस गिफ्ट डीड का उपयोग बैंक से लोन लेने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, लोन का आवेदन दोनों के नाम पर देना होगा।